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World Environment Day पर Govt Ayurveda College ने बांटे 5,000 औषधीय पौधे, क्या है इस पहल का मकसद?

मैसूरु में World Environment Day के अवसर पर Government Ayurveda Medical College ने 5,000 औषधीय पौधों का वितरण किया। पहल का उद्देश्य Ayurvedic पौधों के संरक्षण, पर्यावरण जागरूकता और स्वास्थ्य लाभों को बढ़ावा देना है।

World Environment Day

मैसूरु (कर्नाटक), 5 जून 2026

 World Environment Day के अवसर पर Mysuru के Government Ayurveda Medical College ने एक विशेष अभियान के तहत आम लोगों के बीच 5,000 medicinal plants का वितरण किया। इस पहल का उद्देश्य लोगों को औषधीय पौधों के महत्व से परिचित कराना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और Ayurveda से जुड़ी पारंपरिक जानकारी को जन-जन तक पहुंचाना है। कॉलेज परिसर में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लिया और विभिन्न औषधीय पौधे प्राप्त किए।

World Environment Day पर विशेष अभियान

Government Ayurveda Medical College द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम World Environment Day के अवसर पर आयोजित किया गया। कॉलेज प्रशासन के अनुसार, औषधीय पौधों का वितरण केवल एक पर्यावरणीय गतिविधि नहीं बल्कि लोगों को प्रकृति और स्वास्थ्य के बीच संबंध को समझाने का प्रयास भी है। कार्यक्रम के दौरान नागरिकों को घरों और आसपास के क्षेत्रों में औषधीय पौधों के रोपण और संरक्षण के लिए प्रोत्साहित किया गया। कॉलेज ने इस पहल के माध्यम से हरित आवरण बढ़ाने के साथ-साथ पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली के प्रति जागरूकता फैलाने पर भी जोर दिया।

Ayurveda और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ने की कोशिश

विशेषज्ञों का मानना है कि औषधीय पौधे केवल उपचार के लिए ही नहीं बल्कि जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम के दौरान यह संदेश दिया गया कि औषधीय पौधों की खेती और संरक्षण से आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सकता है। हाल के वर्षों में विभिन्न संस्थानों और सरकारी एजेंसियों द्वारा भी औषधीय पौधों के संरक्षण और प्रचार-प्रसार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

बढ़ रही औषधीय पौधों की रुचि

मेडिसिनल प्लांट्स के प्रति लोगों की बढ़ती रुचि को देखते हुए ऐसे कार्यक्रमों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Ayurveda से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि कई पारंपरिक औषधीय पौधे घरेलू स्तर पर भी उगाए जा सकते हैं और इनके बारे में जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने भी पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक स्वास्थ्य पद्धतियों को बढ़ावा देने वाली इस पहल की सराहना की। कॉलेज का मानना है कि इस प्रकार के अभियान समाज में हरित सोच विकसित करने के साथ-साथ औषधीय पौधों के संरक्षण में भी योगदान देंगे।

औषधीय पौधों के संरक्षण पर बढ़ा फोकस

देशभर में औषधीय पौधों के संरक्षण और संवर्धन को लेकर विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। भारत जैव विविधता की दृष्टि से समृद्ध देशों में शामिल है और यहां हजारों प्रजातियों के औषधीय पौधे पाए जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन पौधों का संरक्षण न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र बल्कि पर्यावरण और आजीविका के लिए भी महत्वपूर्ण है। Mysuru में आयोजित यह कार्यक्रम इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य लोगों को प्रकृति से जोड़ना और पौधारोपण को जन आंदोलन का स्वरूप देना है।

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