नई दिल्ली, 1 जून 2026
विश्व धूम्रपान निषेध दिवस (31 मई) से पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने तंबाकू और निकोटीन उत्पादों के बढ़ते उपयोग पर चिंता जताते हुए सरकारों से नई पीढ़ी को इस लत से बचाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की अपील की है। WHO के अनुसार भारत में तंबाकू सेवन हर वर्ष लगभग 13 लाख लोगों की मौत का कारण बन रहा है, जबकि दुनिया भर में इससे 70 लाख से अधिक लोगों की जान जाती है।
भारत में 26.7 करोड़ लोग करते हैं तंबाकू का सेवन
ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे इंडिया 2016-17 के आंकड़ों के अनुसार देश में करीब 26.7 करोड़ वयस्क किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तंबाकू उत्पादक और उपभोक्ता देश है, जहां तंबाकू उत्पाद अपेक्षाकृत कम कीमत पर आसानी से उपलब्ध हैं।
देश में धुआं रहित तंबाकू का उपयोग सबसे अधिक होता है। खैनी, गुटखा, तंबाकू युक्त पान और जर्दा व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जाते हैं। वहीं बीड़ी, सिगरेट और हुक्का धूम्रपान के प्रमुख माध्यम हैं।
कैंसर, हृदय रोग और स्ट्रोक का बढ़ता खतरा
WHO के अनुसार तंबाकू का सेवन कैंसर, फेफड़ों की बीमारियों, हृदय रोग और स्ट्रोक समेत कई गंभीर बीमारियों का प्रमुख कारण है। तंबाकू में मौजूद निकोटीन व्यक्ति को इसकी लत का शिकार बनाता है, जबकि धुएं में मौजूद हजारों हानिकारक रसायन शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक धूम्रपान केवल एक बुरी आदत नहीं बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जो धीरे-धीरे शरीर को अंदर से कमजोर करती है। यह 20 से अधिक प्रकार के कैंसर और अनेक श्वसन संबंधी रोगों से भी जुड़ा हुआ है।
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तंबाकू से अर्थव्यवस्था पर भी भारी बोझ
स्वास्थ्य संबंधी नुकसान के साथ-साथ तंबाकू देश की अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा बोझ डाल रहा है। एक अध्ययन के अनुसार वर्ष 2017-18 में भारत में 35 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में तंबाकू सेवन से जुड़ी बीमारियों की कुल आर्थिक लागत 1,77,341 करोड़ रुपये (27.5 अरब अमेरिकी डॉलर) रही।
अध्ययन में बताया गया है कि यह लागत देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 1.04 प्रतिशत है। इसके मुकाबले तंबाकू से प्राप्त उत्पाद शुल्क राजस्व इस आर्थिक नुकसान का केवल 12.2 प्रतिशत था। प्रत्यक्ष चिकित्सा खर्च अकेले कुल स्वास्थ्य व्यय का 5.3 प्रतिशत हिस्सा रहा।
युवाओं में बढ़ रहा E-Cigarette और Nicotine का चलन
WHO ने चिंता जताई है कि दुनिया भर में 13 से 15 वर्ष आयु वर्ग के कम से कम 4 करोड़ बच्चे तंबाकू उत्पादों का सेवन कर रहे हैं। इसके अलावा युवाओं में E-Cigarette और Nicotine Pouch के उपयोग में लगातार वृद्धि देखी जा रही है।
संगठन ने सरकारों से आग्रह किया है कि वे बच्चों और युवाओं को तंबाकू तथा निकोटीन उत्पादों की लत से बचाने के लिए सख्त नीतियां लागू करें और जागरूकता अभियान तेज करें।
World No Tobacco Day का उद्देश्य
हर वर्ष 31 मई को मनाया जाने वाला विश्व धूम्रपान निषेध दिवस लोगों को तंबाकू और धूम्रपान से होने वाले स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक नुकसान के प्रति जागरूक करने के लिए आयोजित किया जाता है। इस दिन लोगों को तंबाकू छोड़ने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और आने वाली पीढ़ियों को इस घातक लत से बचाने का संदेश दिया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तंबाकू का सेवन न केवल स्वास्थ्य को प्रभावित करता है बल्कि परिवारों को आर्थिक रूप से कमजोर बनाता है, सामाजिक असमानताओं को बढ़ाता है और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डालता है। ऐसे में तंबाकू नियंत्रण को मजबूत करना सार्वजनिक स्वास्थ्य और सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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