हर साल 16 जुलाई को World Snake Day मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य सांपों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना और उनके संरक्षण का संदेश देना है। भारत में 300 से अधिक प्रजातियों के सांप पाए जाते हैं, जिनमें कुछ विषैले हैं तो कई पूरी तरह गैर-विषैले। विशेषज्ञों के अनुसार सांप पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं क्योंकि वे चूहों और अन्य छोटे जीवों की संख्या नियंत्रित कर प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसी अवसर पर भारत की कुछ प्रमुख और चर्चित Snake Species पर एक नजर डालते हैं।
King Cobra सहित कई प्रजातियां हैं खास
भारत में पाए जाने वाले सबसे चर्चित सांपों में King Cobra प्रमुख है, जिसे दुनिया का सबसे लंबा विषैला सांप माना जाता है। यह मुख्य रूप से पश्चिमी घाट, नीलगिरि, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर भारत के जंगलों में पाया जाता है। इसके अलावा Indian Rock Python एक विशाल लेकिन गैर-विषैला सांप है, जो अपने शिकार को जकड़कर मारता है। वहीं Indian Cobra और Spectacled Cobra भारत के सबसे पहचान योग्य विषैले सांपों में शामिल हैं और सांस्कृतिक दृष्टि से भी इनका विशेष महत्व माना जाता है।
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Big Four में शामिल हैं ये विषैले सांप
भारत में Snakebite के अधिकांश मामलों के लिए जिम्मेदार Big Four सांपों में Indian Cobra, Russell’s Viper और Common Krait प्रमुख हैं। Russell’s Viper अपने शरीर पर बनी विशिष्ट आकृतियों के कारण आसानी से पहचाना जाता है, जबकि Common Krait मुख्य रूप से रात में सक्रिय रहता है। इसके अलावा Banded Krait, Green Pit Viper, Bamboo Pit Viper और Red Sand Boa जैसी प्रजातियां भी भारत के विभिन्न जंगलों और प्राकृतिक क्षेत्रों में पाई जाती हैं। इनमें से Red Sand Boa गैर-विषैला होने के बावजूद अवैध वन्यजीव तस्करी का शिकार बनता रहा है।
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सांप क्यों हैं पर्यावरण के लिए जरूरी?
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि सांप केवल जंगलों तक सीमित जीव नहीं हैं, बल्कि कृषि और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। ये चूहों और अन्य छोटे जीवों की आबादी को नियंत्रित कर फसलों और पर्यावरण की रक्षा करने में मदद करते हैं। World Snake Day का उद्देश्य लोगों में सांपों के प्रति फैली भ्रांतियों को दूर करना और उनके संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि किसी क्षेत्र में सांप दिखाई दे तो उसे नुकसान पहुंचाने के बजाय प्रशिक्षित Snake Rescuer या वन विभाग को सूचना दी जानी चाहिए।
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दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB )
सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।
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