जयपुर/कोटा, 26 मई
राजस्थान के Kota में C-Section ऑपरेशन के बाद महिलाओं की मौत के मामले में बड़ा मोड़ सामने आया है। जांच के दौरान इस्तेमाल किए गए Oxytocin Injection का एक बैच लैब टेस्ट में घटिया पाया गया है, जिसके बाद राज्य सरकार ने संबंधित दवा कंपनी के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। हालांकि, मेडिकल विशेषज्ञों ने साफ कहा है कि इंजेक्शन को सीधे तौर पर मौतों की वजह मानना जल्दबाजी होगी।
राज्यभर में लगाया गया प्रतिबंध
अधिकारियों के अनुसार, Jackson Laboratories द्वारा निर्मित Oxytocin Injection के एक बैच में जरूरी सक्रिय तत्व नहीं मिला। इसके बाद राजस्थान सरकार ने उस बैच की बिक्री और इस्तेमाल पर तत्काल राज्यव्यापी रोक लगा दी है। अस्पतालों, मेडिकल स्टोर्स और फार्मेसियों को भी स्टॉक से इंजेक्शन हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
राजस्थान की प्रधान सचिव (स्वास्थ्य) गायत्री राठौर ने पुष्टि की कि दवा कंपनी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या अस्पताल में भर्ती अन्य गर्भवती महिलाओं को भी यही दवा दी गई थी।
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पांच महिलाओं की मौत के बाद बढ़ा विवाद
कोटा में इलाज के दौरान पांच महिलाओं की मौत के बाद यह मामला गंभीर हो गया। घटना के बाद अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी AIIMS Delhi की विशेषज्ञ टीम ने कोटा पहुंचकर जांच की।
विशेषज्ञ टीम ने अपनी शुरुआती जांच में सुझाव दिया कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले मरीजों को दी गई दवाओं की विस्तृत जांच जरूरी है।
विशेषज्ञों ने क्या कहा?
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रितिका माथुर ने कहा कि Oxytocin Injection के कारण सीधे मातृ मृत्यु होने की संभावना बेहद कम है। उन्होंने बताया कि मृत महिलाओं में शामिल शिरीन नाम की महिला को कथित तौर पर यह इंजेक्शन दिया ही नहीं गया था, फिर भी उन्हें Kidney Failure जैसी गंभीर समस्या हुई और उनकी मौत हो गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि मौतों के पीछे अन्य चिकित्सीय कारणों की भी जांच जरूरी है।
लैब रिपोर्ट में क्या मिला?
जांच के लिए भेजे गए दवा के नमूनों की Central Drug Laboratory में जांच हुई, जिसमें पाया गया कि संबंधित बैच में Oxytocin की मात्रा मौजूद ही नहीं थी। इसी कारण यह बैच गुणवत्ता परीक्षण में फेल हो गया।
राजस्थान खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी Drug Alert में भी इसकी पुष्टि की गई। रिपोर्ट के बाद स्वास्थ्य विभाग और Drug Control अधिकारियों में हड़कंप मच गया।
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हजारों महिलाओं को लगाए गए इंजेक्शन
सहायक औषधि नियंत्रक देवेंद्र कुमार गर्ग ने बताया कि Rajasthan Medical Hall नामक फर्म ने यह इंजेक्शन सप्लाई किया था। उन्होंने कहा कि पिछले चार महीनों में प्रसव के दौरान करीब 12,500 महिलाओं को ये इंजेक्शन लगाए गए।
सोमवार को रिपोर्ट मिलने के बाद अधिकारियों ने असफल बैच के बचे हुए स्टॉक को जब्त करना शुरू कर दिया।
हजारों इंजेक्शन जब्त
अधिकारियों ने कोटा मेडिकल कॉलेज के स्टोर से 2,479 इंजेक्शन जब्त किए, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 25 हजार रुपए बताई गई है। इसके अलावा JK Lon Hospital से 72 इंजेक्शन और सप्लायर के पास मौजूद करीब 950 इंजेक्शन भी जब्त किए गए।
देवेंद्र कुमार गर्ग ने कहा कि रासायनिक विश्लेषण में इंजेक्शन इसलिए फेल हुए क्योंकि उनमें आवश्यक सक्रिय तत्व मौजूद नहीं था। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इंजेक्शन के इस्तेमाल से सीधे मौत, Kidney Failure या ऐसी गंभीर जटिलताओं की संभावना बहुत कम है।
जांच कई स्तरों पर जारी
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि क्या यही बैच दूसरे अस्पतालों या खुले बाजार तक भी पहुंचा था। मामले की जांच कई स्तरों पर जारी है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
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