हैदराबाद , 16 मई
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत कार्यरत भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) ने तेलंगाना के Hyderabad स्थित National Institute of Pharmaceutical Education and Research में ‘Indian Pharmacopoeia 2026’ विषय पर एक वैज्ञानिक सम्मेलन और इंटरैक्टिव सत्र का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का आयोजन NIPER Hyderabad, Central Drugs Standard Control Organization और IDMA Telangana Chapter के सहयोग से किया गया। सम्मेलन का मुख्य विषय “दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में Indian Pharmacopoeia Reference Standards और Impurity Standards का महत्व” रहा।
दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा पर रहा मुख्य फोकस
सम्मेलन में दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता को मजबूत बनाने के लिए फार्माकोपियल मानकों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। भारतीय फार्माकोपिया आयोग ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए दवाओं की गुणवत्ता बेहद महत्वपूर्ण है और इसी उद्देश्य से IPC लगातार वैज्ञानिक एवं नियामक स्तर पर कई पहल कर रहा है।
कार्यक्रम में बताया गया कि Indian Pharmacopoeia Reference Standards और Impurity Standards दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि अशुद्धियों की पहचान और उनके लिए वैज्ञानिक रूप से निर्धारित मानक दवाओं से होने वाले संभावित दुष्प्रभावों को कम करने के लिए आवश्यक हैं।
NIPER Hyderabad में हुआ सम्मेलन का उद्घाटन
सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन Prof. Shailendra Saraf ने किया। उन्होंने फार्मास्यूटिकल गुणवत्ता सुधार के लिए शैक्षणिक संस्थानों और नियामक एजेंसियों के बीच सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के सम्मेलन वैज्ञानिक विचारों के आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण के लिए प्रभावी मंच प्रदान करते हैं।
वहीं IPC के Secretary-cum-Scientific Director Dr. V. Kalaiselvan ने कहा कि फार्माकोपियल मानकों को मजबूत बनाना “Viksit Bharat” के विज़न की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने दवाओं की गुणवत्ता प्रणाली को मजबूत करने के लिए IPC की प्रतिबद्धता दोहराई।
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पहली बार Clinical और Regulatory Experts एक मंच पर आए
इस सम्मेलन की विशेषता यह रही कि पहली बार Regulatory, Clinical, Analytical और Pharmaceutical Industry से जुड़े विशेषज्ञ एक साथ एक मंच पर पहुंचे। सम्मेलन में फार्माकोपियल अशुद्धियों के Clinical Impact और Patient Safety पर उनके प्रभावों को लेकर विचार-विमर्श किया गया।
विशेषज्ञों ने इस बात पर चर्चा की कि दवाओं में मौजूद अशुद्धियां किस प्रकार Adverse Drug Reactions और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े जोखिम पैदा कर सकती हैं। इसके अलावा Pharmaceutical Industry से जुड़े प्रतिनिधियों ने Impurity Standards के विकास और उनके Implementation से जुड़े अनुभव भी साझा किए।
Technical Sessions में Regulatory Compliance और Global Concerns पर चर्चा
सम्मेलन के Technical Sessions में IPC, CDSCO, शिक्षाविदों और दवा उद्योग के विशेषज्ञों ने Pharmacopoeial Standards, Drug Quality Assurance, Regulatory Compliance, Risk Assessment और Drug Impurity Management जैसे विषयों पर चर्चा की।
विशेषज्ञों ने Indian Pharmacopoeia 2026 में हुए नए बदलावों, वैश्विक स्तर पर उभरती चुनौतियों और Regulatory Control Mechanisms से जुड़े समकालीन मुद्दों पर भी अपने विचार रखे।
Open Discussion के साथ सम्मेलन का समापन
कार्यक्रम का समापन एक Interactive Open Discussion के साथ हुआ, जिसमें IPC, CDSCO, राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरणों, चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और उद्योग प्रतिनिधियों ने दवा गुणवत्ता और अशुद्धियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।
सम्मेलन में देशभर से Regulators, Pharmaceutical Professionals, Researchers, Analytical Scientists और Academicians ने भाग लिया। IPC ने कहा कि यह आयोजन वैज्ञानिक रूप से मजबूत फार्माकोपियल मानकों के माध्यम से सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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