नई दिल्ली, 11 मई।
कृषि, पोषण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने संयुक्त रूप से ‘सेहत’ मिशन की शुरुआत की है। ‘सेहत’ यानी कृषि परिवर्तन के माध्यम से स्वास्थ्य के लिए विज्ञान उत्कृष्टता एक राष्ट्रीय मिशन-मोड कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र में हो रही प्रगति को सीधे लोगों के स्वास्थ्य लाभ से जोड़ना है।
इस संयुक्त पहल का शुभारंभ केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री Jagat Prakash Nadda और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने किया। कार्यक्रम में वरिष्ठ नीति निर्माता, वैज्ञानिक और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि ‘सेहत’ मिशन भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में उपचारात्मक मॉडल से निवारक और समग्र स्वास्थ्य सेवा मॉडल की ओर बढ़ते बदलाव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में पिछले एक दशक में देश की स्वास्थ्य नीतियों में बड़ा परिवर्तन आया है और अब सरकार बीमारियों के इलाज से पहले उनकी रोकथाम पर अधिक ध्यान दे रही है।
नड्डा ने कहा कि यह पहल कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्र के बीच बेहतर तालमेल का उदाहरण है। उन्होंने बताया कि पहले देश आयातित तकनीकों और बाहरी मॉडलों पर अधिक निर्भर था, लेकिन अब भारत अपनी आवश्यकताओं और भारतीय डेटा के आधार पर स्वदेशी नवाचारों को विकसित कर रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किफायती और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं सभी तक पहुंचाना है। इसके लिए रोकथाम, समय पर जांच और निरंतर स्वास्थ्य देखभाल पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उन्होंने आईसीएमआर की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि संस्था वैज्ञानिक शोध, नीति निर्माण और स्वास्थ्य नवाचारों को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रही है।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि भारत इस समय दोहरी स्वास्थ्य चुनौती का सामना कर रहा है। एक ओर कुपोषण की समस्या है, वहीं दूसरी ओर मधुमेह, उच्च रक्तचाप, कैंसर और अन्य जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं के समाधान में संतुलित आहार और पोषण की महत्वपूर्ण भूमिका है।
नड्डा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चीनी, नमक और तेल के अत्यधिक सेवन को कम करने की अपील का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जहां आईसीएआर पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक खाद्य प्रणालियों के विकास में मदद करेगा, वहीं आईसीएमआर वैज्ञानिक प्रमाणों के माध्यम से इन उपायों की प्रभावशीलता को प्रमाणित करेगा।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि स्वस्थ समाज की नींव पौष्टिक भोजन पर आधारित होती है। उन्होंने कहा कि कृषि और स्वास्थ्य एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं और वर्तमान समय में दोनों क्षेत्रों के बीच समन्वय बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि ‘सेहत’ मिशन कृषि उत्पादन को लोगों की पोषण संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। चौहान ने जैविक और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इससे नागरिकों के स्वास्थ्य में सुधार आएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को सही खानपान के प्रति जागरूक करना जरूरी है, खासकर मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी जीवनशैली संबंधी बीमारियों को देखते हुए। उन्होंने कहा कि सही भोजन ही सबसे बड़ी औषधि बन सकता है।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव और आईसीएमआर के महानिदेशक Rajiv Bahl ने कहा कि भारत इस समय कुपोषण और अतिपोषण दोनों समस्याओं से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि को केवल खाद्य उत्पादन तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि उसे पोषण और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुधार के प्रमुख साधन के रूप में विकसित करना होगा।
सरकार का मानना है कि ‘सेहत’ मिशन कृषि, पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं को एकीकृत कर देश में निवारक स्वास्थ्य मॉडल को मजबूत करेगा और आने वाले समय में एक स्वस्थ भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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