नई दिल्ली, 9 मई।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) ने इंडियाएआई मिशन और भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) बेंगलुरु के सहयोग से आयोजित ‘एबी पीएम-जेएवाई ऑटो-एडजुडिकेशन हैकाथॉन शोकेस 2026’ का सफल समापन किया। इस दो दिवसीय राष्ट्रीय आयोजन का उद्देश्य आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी पीएम-जेएवाई) के तहत स्वास्थ्य दावों के निपटान को तेज, पारदर्शी और अधिक सटीक बनाना था।
हैकाथॉन में देशभर से 3,500 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें स्टार्टअप्स, शोधकर्ता, छात्र, तकनीकी विशेषज्ञ और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े नवप्रवर्तक शामिल रहे। प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत एआई आधारित समाधानों का मूल्यांकन सरकार, शिक्षा जगत, स्वास्थ्य सेवा और तकनीकी क्षेत्र के विशेषज्ञों की जूरी ने किया।
तीन प्रमुख समस्या श्रेणियों में विजेता टीमों का चयन किया गया। “क्लिनिकल दस्तावेज वर्गीकरण और मानक उपचार दिशानिर्देश अनुपालन” श्रेणी में विनय बाबू उल्ली के नेतृत्व वाली टीम ‘निर्णया’ ने पहला स्थान हासिल किया। टीम ने स्वास्थ्य दावों के दस्तावेजों की स्वचालित व्याख्या और मानक उपचार दिशानिर्देशों के अनुपालन की जांच के लिए एआई आधारित समाधान विकसित किया।
“रेडियोलॉजिकल इमेज आधारित स्थिति पहचान और रिपोर्ट सहसंबंध” श्रेणी में हरीश कुमार के नेतृत्व वाली टीम ‘बिल्टआईक्यू एआई’ विजेता रही। इस टीम ने एआई आधारित रेडियोलॉजी विश्लेषण और रिपोर्टिंग समाधान प्रस्तुत किया।
वहीं “दस्तावेज जालसाजी और डीपफेक पहचान” श्रेणी में प्रवीण श्रीधर और स्नेहल जोशी की टीम ‘सोपा क्लेम्स’ ने पहला स्थान प्राप्त किया। टीम ने एआई आधारित धोखाधड़ी पहचान प्रणाली विकसित की, जो फर्जी दस्तावेज और संदिग्ध दावों की पहचान करने में सक्षम है।
प्रत्येक श्रेणी में विजेता टीमों को क्रमशः 5 लाख रुपए, उपविजेताओं को 3 लाख रुपए और द्वितीय उपविजेताओं को 2 लाख रुपए के नकद पुरस्कार दिए गए। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने संकेत दिया कि विजेता समाधानों को भविष्य में एबी पीएम-जेएवाई प्रणाली में लागू करने की दिशा में सहयोग किया जाएगा।
आयोजन के दौरान “दावों के निपटान का भविष्य” विषय पर उच्च स्तरीय चर्चा भी आयोजित की गई। इसमें सरकार, बीमा कंपनियों, अस्पतालों और तकनीकी विशेषज्ञों ने एआई और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना की भूमिका पर विचार साझा किए। विशेषज्ञों ने कहा कि एआई आधारित स्वचालन से स्वास्थ्य दावों की प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और विश्वसनीय बन सकती है।
एक अन्य चर्चा “एआई के युग में धोखाधड़ी, अपव्यय और दुरुपयोग” विषय पर हुई, जिसमें फर्जी दस्तावेज, पहचान की चोरी और डीपफेक जैसी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने मजबूत एआई आधारित सुरक्षा प्रणालियों और डेटा गोपनीयता ढांचे की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम के दौरान आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) को मजबूत बनाने के लिए बड़े अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों के साथ विशेष गोलमेज सम्मेलन भी आयोजित किए गए। इनमें डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड, इंटरऑपरेबिलिटी और मरीज केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई।
इसके अलावा भारत-विशिष्ट हेल्थ एआई मॉडल विकसित करने को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि स्वदेशी डेटासेट, साझा मानक और मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए भारत अपनी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में सुरक्षित और जिम्मेदार एआई उपयोग का वैश्विक मॉडल बन सकता है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने कहा कि यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी, तकनीक आधारित और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जिससे एबी पीएम-जेएवाई के तहत लाभार्थियों को बेहतर और तेज सेवाएं मिल सकेंगी।
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