नई दिल्ली, 8 मई।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) ने इंडियाएआई मिशन और भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलुरु के सहयोग से एबी पीएम-जेएवाई ऑटो-एडजुडिकेशन हैकाथॉन शोकेस 2026 का आयोजन किया। दो दिवसीय इस राष्ट्रीय कार्यक्रम का उद्देश्य आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी पीएम-जेएवाई) के तहत स्वास्थ्य दावों के निपटान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित समाधान विकसित करना और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी, तेज और प्रभावी बनाना है।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में नीति निर्माताओं, तकनीकी विशेषज्ञों, स्टार्टअप्स, बीमा कंपनियों, अस्पतालों, शिक्षाविदों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में एआई आधारित उन समाधानों को प्रस्तुत किया गया, जो स्वास्थ्य दावों की जांच, धोखाधड़ी की पहचान और दस्तावेजों के सत्यापन जैसी प्रक्रियाओं को अधिक सटीक और तेज बना सकते हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सुनील कुमार बरनवाल ने कहा कि यह पहल न केवल आयुष्मान भारत योजना के तहत स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने का माध्यम है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की कार्यक्षमता बढ़ाने की दिशा में भी बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि भारत उन विकासशील देशों में शामिल हो गया है, जिसने स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई आधारित समाधान विकसित करने के लिए अपना बेंचमार्किंग और डेटा प्लेटफॉर्म तैयार किया है।
उन्होंने बताया कि एनएचए स्वास्थ्य सेवाओं में एआई के उपयोग को लगातार बढ़ावा दे रहा है। आईआईटी कानपुर में विकसित स्वास्थ्य एआई प्लेटफॉर्म ‘बीओडीएच’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत-विशिष्ट डेटा के आधार पर एआई समाधानों को मान्य करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल है।
डॉ. बरनवाल ने कहा कि एबी पीएम-जेएवाई के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों के बीच भरोसा बनाए रखने और दावों के त्वरित निपटान के लिए मजबूत एवं पारदर्शी न्यायनिर्णय प्रक्रिया बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि योजना के तहत उपलब्ध विशाल स्वास्थ्य डेटा का उपयोग एआई तकनीक के माध्यम से बेहतर परिणाम देने में किया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान हैकाथॉन में विकसित कई उन्नत एआई और मशीन लर्निंग आधारित समाधानों का प्रदर्शन किया गया। इन समाधानों को तीन प्रमुख समस्याओं के आधार पर तैयार किया गया था।
पहला विषय था नैदानिक दस्तावेजों का वर्गीकरण और मानक उपचार दिशानिर्देशों का अनुपालन। इसमें प्रतिभागियों ने ऐसे एआई समाधान प्रस्तुत किए, जो अलग-अलग प्रकार के मेडिकल दस्तावेजों को स्वतः पहचानने और उनमें मौजूद सूचनाओं को व्यवस्थित रूप से निकालने में सक्षम हैं। इन प्रणालियों में बहुभाषी ओसीआर तकनीक का उपयोग किया गया, जो खराब गुणवत्ता वाले स्कैन किए गए दस्तावेजों को भी पढ़ सकती है। साथ ही, ये सिस्टम अस्पतालों की मुहर, अधिकृत हस्ताक्षर और उपचार संबंधी जरूरी मानकों की जांच भी कर सकते हैं।
दूसरा विषय था रेडियोलॉजिकल इमेज आधारित स्थिति पहचान और रिपोर्ट सहसंबंध। इसमें विकसित एआई टूल एक्स-रे, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी मेडिकल इमेज का विश्लेषण कर सकते हैं। ये समाधान रेडियोग्राफिक रिपोर्ट और अस्पताल द्वारा प्रस्तुत दावों का मिलान कर निदान और उपचार की सटीकता जांचने में मदद करते हैं। इससे दावा निपटान प्रक्रिया तेज और अधिक विश्वसनीय बन सकती है।
तीसरा विषय था दस्तावेज जालसाजी और डीपफेक की पहचान। प्रतिभागियों ने ऐसे एआई मॉडल विकसित किए, जो फर्जी मेडिकल रिपोर्ट, छेड़छाड़ किए गए बिल, नकली डिस्चार्ज सारांश और डीपफेक दस्तावेजों की पहचान कर सकते हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की तकनीकें एबी पीएम-जेएवाई के तहत धोखाधड़ी रोकने और योजना की पारदर्शिता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएंगी।
कार्यक्रम में “भारतीय स्वास्थ्य सेवा के लिए एआई का निर्माण” विषय पर एक उच्च स्तरीय पैनल चर्चा भी आयोजित की गई। इस चर्चा की अध्यक्षता इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने की। पैनल में सरकार, स्वास्थ्य तकनीक कंपनियों, शिक्षा जगत और एआई विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने भारत की स्वास्थ्य प्रणाली में एआई तकनीकों को लागू करने के व्यावहारिक तरीकों, नीतिगत पहलुओं और भविष्य की रणनीतियों पर विचार साझा किए। विशेष रूप से स्थानीय भाषाओं और कम संसाधन वाले क्षेत्रों में एआई आधारित समाधान लागू करने की चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा हुई।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में एआई के प्रभावी उपयोग के लिए मजबूत डेटा सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण डेटासेट, गोपनीयता संरक्षण और विश्वसनीय सत्यापन प्रणाली आवश्यक है। इसके अलावा, एआई आधारित समाधान तभी सफल होंगे जब उन्हें मौजूदा स्वास्थ्य तंत्र के साथ सहज रूप से जोड़ा जा सके।
इस अवसर पर एनएचए की संयुक्त सचिव (पीएमजेएवाई) ज्योति यादव, आईआईएससी बेंगलुरु के निदेशक प्रोफेसर गोविंदन रंगराजन, स्वास्थ्य सेवा विशेषज्ञ, छात्र और कई नवप्रवर्तक उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण का कहना है कि इस हैकाथॉन का उद्देश्य ऐसे डिजिटल समाधान विकसित करना है, जो एबी पीएम-जेएवाई की मौजूदा प्रणाली के साथ आसानी से एकीकृत हो सकें, मैन्युअल कार्यभार कम करें और स्वास्थ्य दावों के निपटान को अधिक तेज, पारदर्शी और भविष्य के अनुरूप बना सकें।
सरकार का मानना है कि एआई आधारित यह पहल भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को आधुनिक बनाने और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक कुशल एवं विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।
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