मध्य प्रदेश, 19 अगस्त 2026
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने Leprosy के प्रसार को रोकने और National Leprosy Eradication Programme (NLEP) के Implementation को मजबूत करने के लिए मध्य प्रदेश के इंदौर में दो दिवसीय Review-cum-Capacity Building Workshop शुरू की है। 19 अगस्त से शुरू हुई इस कार्यशाला में Leprosy की Epidemiological स्थिति की समीक्षा, कार्यक्रम के प्रदर्शन का आकलन, Implementation Gaps की पहचान और जिला स्तर पर अपनाई जा रही Best Practices पर चर्चा की गई। कार्यशाला में 70 से अधिक स्वास्थ्य अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों और साझेदार संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
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Early Detection पर जोर
Workshop में Leprosy के Transmission को रोकने के लिए मरीजों की जल्द पहचान को महत्वपूर्ण उपाय के रूप में रखा गया। चर्चा के दौरान Contact Tracing, समय पर Treatment शुरू करने और Treatment पूरा कराने के साथ Disability Prevention तथा Intensive Surveillance को मजबूत करने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने Program Data के आधार पर ऐसे जिलों और क्षेत्रों की पहचान करने की आवश्यकता बताई, जहां Leprosy की निगरानी और Targeted Intervention को अधिक मजबूत करने की जरूरत है। प्रति 10,000 आबादी पर Leprosy की Prevalence Rate को 1 से नीचे लाने के लिए Focused Strategies लागू करने पर भी विशेष जोर दिया गया।
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70 से अधिक अधिकारी शामिल
Leprosy से संबंधित इस Workshop में Directorate General of Health Services (DGHS) के Additional Director General, Deputy Director General (Leprosy), Central Leprosy Division के अधिकारी, RLTRI Raipur और Aska Institute के प्रतिनिधि, State Leprosy Officers, Chief Medical and Health Officers, मध्य प्रदेश के सभी 51 जिलों के District Leprosy Officers और District Consultants शामिल हुए। इसके अलावा Technical Development Partners और APAL के एक प्रतिनिधि ने भी भाग लिया। Workshop की शुरुआत मध्य प्रदेश के State Leprosy Officer के Welcome Address से हुई, जिसके बाद DGHS के Additional Director General ने Special Address दिया।
District Experiences भी साझा किए
Workshop के पहले दिन Leprosy से जुड़े कई Technical Sessions आयोजित किए गए। WHO की National Programme Officer डॉ. रश्मी शुक्ला ने Leprosy Case Detection Campaign (LCDC) की Quality और Outcomes में सुधार पर Session लिया। वहीं RLTRI Raipur के डॉ. संदीप जोगदंड ने Retrospective और Reverse Contact Tracing पर Technical Guidance दिया। इसके बाद अलीराजपुर, अनूपपुर, बड़वानी, बुरहानपुर और धार सहित मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों के District Leprosy Officers ने अपने अनुभव साझा किए। इन Sessions में Leprosy की Early Detection, समय पर Treatment, Operational Challenges और Disability Prevention से जुड़े जिला स्तर के प्रयासों पर चर्चा हुई।
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20 अगस्त को भी जारी रहेगी Workshop
Leprosy नियंत्रण कार्यक्रम को जमीनी स्तर पर और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से Workshop का दूसरा दिन 20 अगस्त 2026 को आयोजित होगा। इसमें District-Level Strategies को मजबूत करने, Program Implementation में सुधार और Leprosy के Transmission को रोकने के लिए Targeted Interventions में तेजी लाने पर आगे चर्चा होगी। Experience Sharing के दौरान Peer Learning को भी बढ़ावा दिया गया। APAL के Vice President ने Early Detection और Community-Level Action से जुड़े सुझाव साझा करते हुए Leprosy से प्रभावित लोगों के दृष्टिकोण को Program Implementation में शामिल करने और Community Participation बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
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दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB )
सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।
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