अस्पताल पर हुई कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, घटना के बाद Nishu Hospital में अनियमितताएं सामने आने पर कार्रवाई की गई। विभाग ने अस्पताल की सभी medical activities तत्काल प्रभाव से बंद कर दी हैं। Principal Secretary Gayatri Rathore ने बताया कि मामले को गंभीरता से लेते हुए अस्पताल का licence cancel किया गया है। इसके साथ ही hospital operator के खिलाफ Medical Council में कार्रवाई की recommendation की गई है। वहीं, संबंधित nursing staff member के खिलाफ Nursing Council में कार्रवाई की recommendation की गई है। अधिकारियों का कहना है कि घटना की जानकारी मिलते ही विभाग की ओर से prompt action शुरू किया गया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में महिला की मौत का विस्तृत medical cause या किसी जांच के अंतिम निष्कर्ष का उल्लेख नहीं किया गया है।यह भी पढ़ें: Supreme Court का बड़ा कदम, Hospitals के लिए बनेंगे नए Guidelines
Doctor की गैरमौजूदगी में Delivery
अधिकारियों के अनुसार, घटना 4 अगस्त को हुई थी। उस समय hospital में Doctor मौजूद नहीं था और एक nursing staff member ने कथित तौर पर pregnant woman की delivery कराई। delivery के बाद महिला की मौत हो गई। इसी मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने hospital की कार्यप्रणाली और उपलब्ध medical services को लेकर कार्रवाई की। विभाग की ओर से इसे maternal health services में गंभीर मामला माना गया है। Principal Secretary ने maternal और child health services की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में negligence के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही pregnant women के health data को समय पर और सही तरीके से update करने तथा high-risk pregnancies की शुरुआती पहचान पर भी जोर दिया गया।
Maternal Health पर सख्त निर्देश
इस घटना के बाद Principal Secretary (Medical and Health) Gayatri Rathore ने Health Bhawan में video conference के जरिए maternal और child health services तथा maternal mortality के मामलों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि maternal और child health services में negligence के मामलों में सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही pregnant women की health monitoring को प्रभावी बनाने और उनके health data को timely तथा accurately update करने पर जोर दिया गया। अधिकारियों को high-risk pregnancies की समय रहते पहचान करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि जरूरत पड़ने पर pregnant women को उचित medical care और समय पर referral उपलब्ध कराया जा सके। विभाग का फोकस maternal healthcare की monitoring मजबूत करने और pregnancy से जुड़े जोखिमों की शुरुआती पहचान पर है।यह भी पढ़ें: IIRF Rankings 2026: AIIMS New Delhi फिर नंबर-1, जानें Top 10 Medical Colleges...
दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB ) सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।

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