नई दिल्ली, 20 अगस्त 2026
AIIMS Rishikesh को गलत तरीके से एक मरीज को HIV Positive दर्ज करने के मामले में Medical Negligence का दोषी ठहराया गया है। Uttarakhand State Consumer Commission ने 17 अगस्त को Haridwar District Consumer Commission के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें AIIMS को मरीज को ₹50,000 Compensation और ₹10,000 Litigation Cost देने का निर्देश दिया गया था। यानी अस्पताल को कुल ₹60,000 का भुगतान करना होगा। मामला 2014 का है, जब AIIMS Rishikesh के Medical Records और Discharge Summary में मरीज को HIV Positive दर्ज किया गया था, जबकि बाद में Dehradun के दो अलग-अलग Medical Institutions में हुई जांच में उसे HIV Negative पाया गया।
HIV Report पर उठा विवाद
मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता की तबीयत 12 जुलाई 2014 को खराब हुई थी और 15 जुलाई को उसे एक डॉक्टर से परामर्श के बाद Higher Centre के लिए Refer किया गया। उसी दिन उसे AIIMS Rishikesh में भर्ती कराया गया। अगले दिन यानी 16 जुलाई को उसे Discharge कर दिया गया, लेकिन Medical Records में उसे HIV Positive दर्ज किया गया। इसके बाद मरीज ने Shri Guru Ram Rai Institute of Medical and Health Sciences और Shri Mahant Indiresh Hospital, Dehradun में जांच कराई, जहां उसे HIV Negative पाया गया। शिकायतकर्ता ने गलत Diagnosis के कारण Mental और Physical Agony के साथ Financial Loss होने का दावा किया और Consumer Commission का रुख किया।
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AIIMS ने आरोपों से किया था इनकार
मामले की सुनवाई के दौरान AIIMS Rishikesh ने Medical Negligence के आरोपों को स्वीकार नहीं किया। संस्थान ने कहा कि उसने मरीज का HIV Test या HIV Positive Diagnosis नहीं किया था। AIIMS ने यह भी तर्क दिया कि शिकायतकर्ता ने Negligence साबित करने के लिए Expert Medical Evidence पेश नहीं किया। इसके अलावा संस्थान ने Consumer Commission के Jurisdiction और इस सवाल पर भी आपत्ति जताई कि मुफ्त या बहुत कम शुल्क पर दी गई सेवाओं के मामले में शिकायतकर्ता को Consumer माना जा सकता है या नहीं। हालांकि State Commission ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। Commission ने पाया कि AIIMS ने मरीज से Investigation और अन्य Charges के लिए ₹270 लिए थे।
Medical Records ने AIIMS के दावे को कमजोर किया
State Commission की President Kumkum Rani और Member CM Singh की Bench ने पाया कि AIIMS के अपने Medical Records ही संस्थान के उस दावे से मेल नहीं खाते थे कि मरीज का HIV Positive Diagnosis नहीं किया गया था। Commission के अनुसार, Discharge Summary में मरीज को बार-बार HIV Positive दर्ज किया गया था और आगे HIV Treatment लेने की सलाह भी दी गई थी। बाद की Medical Reports में मरीज HIV Negative पाया गया। Commission ने कहा कि AIIMS अपने Records में दर्ज HIV Positive Entries की पर्याप्त व्याख्या या Supporting Documents प्रस्तुत नहीं कर सका। इसी आधार पर Commission ने माना कि Medical Records में HIV Positive दर्ज करने की जिम्मेदारी से AIIMS खुद को अलग नहीं कर सकता।
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AIIMS को देना होगा ₹60,000
Commission ने माना कि HIV जैसी गंभीर बीमारी का Diagnosis विशेष सावधानी के साथ किया जाना चाहिए, क्योंकि इसके Medical के साथ-साथ Social और Psychological Consequences भी हो सकते हैं। आयोग के अनुसार, बिना Supporting Diagnostic Material के Official Medical Records में मरीज को बार-बार HIV Positive दर्ज करना Duty of Care के उल्लंघन के दायरे में आता है। Commission ने Medical Negligence स्थापित करने के लिए आवश्यक Duty of Care, उसके Breach और उससे होने वाले Injury या Damage के तीनों पहलुओं को पूरा माना। इसके बाद State Commission ने AIIMS Rishikesh की Appeal खारिज करते हुए अप्रैल 2019 के Haridwar District Consumer Commission के आदेश को बरकरार रखा। AIIMS को ₹50,000 Compensation और ₹10,000 Litigation Expenses यानी कुल ₹60,000 का भुगतान करना होगा। Appeal पर कोई अतिरिक्त Cost नहीं लगाई गई।
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दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB )
सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।
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