Chhattisgarh High Court ने एक महत्वपूर्ण फैसले में Radiologist के खिलाफ चल रही POCSO Act की आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केवल Sonography करने के आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि डॉक्टर को किसी यौन अपराध की जानकारी थी। अदालत ने कहा कि POCSO Act के तहत रिपोर्ट करने की कानूनी जिम्मेदारी तभी बनती है, जब संबंधित व्यक्ति को अपराध की वास्तविक जानकारी हो। केवल पेशेवर दायित्व निभाने के दौरान जांच करना अपने आप में अपराध की जानकारी होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
Court ने क्या कहा?
हाई कोर्ट ने कहा कि मामले में न तो FIR, न जांच के दौरान दर्ज बयान और न ही Supplementary Charge Sheet में ऐसा कोई ठोस साक्ष्य मौजूद है जिससे यह साबित हो सके कि पीड़िता ने Radiologist को यौन उत्पीड़न की जानकारी दी थी या डॉक्टर को किसी POCSO अपराध की जानकारी थी। अदालत ने यह भी पाया कि डॉक्टर पर अपराध में शामिल होने, किसी आरोपी की मदद करने या साक्ष्य छिपाने का भी कोई आरोप नहीं था। ऐसे में केवल Sonography करने के आधार पर POCSO Act की धाराओं के तहत कार्रवाई जारी रखना कानून के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
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Supreme Court के फैसले का हवाला
फैसले में Supreme Court के Sr. Tessy Jose vs State of Kerala मामले का भी उल्लेख किया गया। हाई कोर्ट ने कहा कि सर्वोच्च अदालत पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि Section 19 और Section 21 के तहत रिपोर्ट करने का दायित्व तभी उत्पन्न होता है, जब संबंधित व्यक्ति को अपराध की वास्तविक जानकारी हो। बिना ऐसे आधार के किसी डॉक्टर के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाना उचित नहीं है। इसी सिद्धांत को लागू करते हुए अदालत ने Radiologist के खिलाफ जारी POCSO कार्यवाही को निरस्त कर दिया।
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डॉक्टरों के लिए अहम फैसला
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला चिकित्सा पेशे से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि डॉक्टरों के नियमित चिकित्सा कार्यों को केवल अनुमान या आशंका के आधार पर आपराधिक दायरे में नहीं लाया जा सकता। यदि किसी डॉक्टर के खिलाफ POCSO Act के तहत कार्रवाई करनी है तो यह दिखाना आवश्यक होगा कि उसे अपराध की जानकारी थी और इसके बावजूद उसने कानून के तहत रिपोर्ट नहीं की। अदालत ने माना कि इस मामले में ऐसे आवश्यक तथ्य मौजूद नहीं थे, इसलिए कार्यवाही जारी रखना उचित नहीं था।
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दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB )
सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।
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