नई दिल्ली, 10 जुलाई 2026
मानसून के दौरान सरकारें आमतौर पर बाढ़ और जलभराव जैसी आपदाओं से निपटने की तैयारी करती हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में Snakebite का खतरा भी तेजी से बढ़ जाता है। उनका मानना है कि Flood Management के साथ-साथ Snakebite Prevention, Anti-venom की उपलब्धता और लोगों में जागरूकता बढ़ाने की तैयारी भी समान रूप से जरूरी है। बारिश और बाढ़ के कारण सांप अपने प्राकृतिक बिलों से बाहर निकलकर आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं, जिससे इंसानों और सांपों का सामना बढ़ जाता है।
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बारिश में क्यों बढ़ जाते हैं Snakebite के मामले?
विशेषज्ञों के अनुसार भारी बारिश और बाढ़ के दौरान सांप सुरक्षित और सूखी जगहों की तलाश में घरों, खेतों और बस्तियों की ओर आ जाते हैं। यही वजह है कि मानसून के महीनों में Snakebite के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिलती है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में काम करने वाले लोग, जलभराव वाले इलाकों के निवासी और फर्श पर सोने वाले लोग अधिक जोखिम में रहते हैं। इसलिए लोगों को रात में टॉर्च का उपयोग करने, जूते पहनकर चलने और घर के आसपास साफ-सफाई बनाए रखने की सलाह दी जाती है।
सरकारों को किन तैयारियों पर देना होगा जोर?
रिपोर्ट में कहा गया है कि मानसून के दौरान स्वास्थ्य विभागों को पर्याप्त मात्रा में Anti-venom उपलब्ध कराना, अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को Snakebite उपचार के लिए तैयार रखना और प्रभावित क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाना जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर इलाज मिलने से अधिकांश गंभीर मामलों में जान बचाई जा सकती है। इसके साथ ही Snakebite Surveillance, त्वरित Referral System और प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है।
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Snakebite को लेकर जागरूकता भी जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि Snakebite की स्थिति में घरेलू उपचार या अंधविश्वास पर भरोसा करने के बजाय मरीज को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाना चाहिए। प्रभावित अंग को स्थिर रखना और जल्द से जल्द चिकित्सा सहायता प्राप्त करना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। समय पर सही उपचार और Anti-venom मिलने से Snakebite से होने वाली मृत्यु और गंभीर जटिलताओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
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दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB )
सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।
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