नई दिल्ली, 06 जून 2026 (PIB)
पिछले 12 वर्षों में सरकार ने भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ किया है। पीआईबी दिल्ली द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, देश ने Universal Health Coverage की दिशा में निरंतर और मजबूत प्रगति की है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) और आयुष्मान भारत योजना जैसी महत्वाकांक्षी पहलों के माध्यम से चिकित्सा सेवाओं को अधिक सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण बनाया गया है।
आंकड़ों के मुताबिक, देश में स्वास्थ्य पर होने वाले ‘Out-of-Pocket’ (जेब से होने वाले) खर्च में भारी गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2014-15 में कुल स्वास्थ्य खर्च का 62.6% हिस्सा लोगों को अपनी जेब से देना पड़ता था, जो वर्ष 2021-22 में घटकर 39.4% रह गया है। इसके विपरीत, सरकारी स्वास्थ्य व्यय 29% से बढ़कर 48% हो गया है।
आयुष्मान भारत: 44 करोड़ कवच
Universal Health Coverage के तहत वर्ष 2018 में लॉन्च की गई ‘आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ (AB-PMJAY) आज विश्व की सबसे बड़ी सार्वजनिक रूप से वित्तपोषित स्वास्थ्य आश्वासन योजना बन चुकी है।
इसके तहत अब तक 44.14 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। योजना के अंतर्गत 12.03 करोड़ अस्पताल में भर्ती मामलों को कवर करते हुए 1,80,435 करोड़ रुपये मूल्य का उपचार प्रदान किया जा चुका है।
अक्टूबर 2024 में इस योजना का ऐतिहासिक विस्तार करते हुए ‘आयुष्मान भारत वय वंदना’ के तहत 70 वर्ष से अधिक आयु के 1.20 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को भी इसके दायरे में लाया गया है।
प्राथमिक स्वास्थ्य विस्तार
देशभर के प्रत्येक मोहल्ले और समुदाय तक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने के उद्देश्य से 1.86 लाख से अधिक ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ (AAM) संचालित किए जा रहे हैं। ये केंद्र मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल के अलावा 12 प्रकार की निःशुल्क प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ और दवाएँ प्रदान करते हैं।
इसके अतिरिक्त, देश में 18,000+ ‘जन औषधि केंद्र’ कार्यरत हैं, जहाँ जेनेरिक दवाएँ बाजार मूल्य की तुलना में 50 से 90 प्रतिशत तक कम कीमतों पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।
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रोग नियंत्रण में प्रगति
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लक्षित कार्यक्रमों के कारण संक्रामक रोगों के प्रसार में रिकॉर्ड कमी आई है:
- तपेदिक (TB): भारत में टीबी के मामलों में वैश्विक औसत की तुलना में दोगुनी दर से कमी आई है। ‘प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान’ के तहत 20 करोड़ से अधिक लोगों की जांच की जा चुकी है।
- मलेरिया: वर्ष 2015 की तुलना में 2023 तक मलेरिया के मामलों में 80% और इससे होने वाली मौतों में 78% की गिरावट दर्ज की गई है।
- मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य: ‘मिशन इंद्रधनुष’ के तहत जनवरी 2026 तक 98.4% टीकाकरण कवरेज हासिल किया गया है।
डिजिटल हेल्थ और AI
भौतिक अवसंरचना के साथ-साथ ‘आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन’ (ABDM) के तहत देश में एक मजबूत डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण किया जा रहा है। जून 2026 तक ‘आभा’ (ABHA) खाते से जुड़े स्वास्थ्य रिकॉर्ड्स की संख्या 100 करोड़ को पार कर गई है। इसके साथ ही ‘ई-संजीवनी’ टेलीमेडिसिन सेवा के माध्यम से 47 करोड़ से अधिक परामर्श दिए जा चुके हैं। ‘कफ अगेंस्ट टीबी’ और ‘मधुरनेत्र AI’ जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स का उपयोग करके चिकित्सा जांच और रोग पहचान को और अधिक सटीक बनाया जा रहा है।
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