सहारनपुर, 2 जून 2026
हृदय रोगों के उपचार में तेजी से हो रहे तकनीकी बदलाव अब मरीजों के लिए नई उम्मीद लेकर आ रहे हैं। आधुनिक चिकित्सा तकनीकों की मदद से कई ऐसी जटिल हृदय बीमारियों का उपचार संभव हो रहा है, जिनके लिए पहले Open Heart Surgery आवश्यक मानी जाती थी। यह जानकारी Mohali स्थित Fortis Hospital के वरिष्ठ Cardiologist डॉ. सुधांशु बुडाकोटी ने Saharanpur में Indian Medical Association (IMA) द्वारा आयोजित एक वैज्ञानिक गोष्ठी में दी।
बिना सर्जरी संभव हुआ Heart Valve Treatment
जी.पी.ओ. रोड स्थित एक होटल के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. बुडाकोटी ने हृदय रोगों के उपचार में उपयोग हो रही नई तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के कारण अब वाल्वुलर हार्ट डिजीज का उपचार बिना ओपन हार्ट सर्जरी के भी संभव हो गया है।
उन्होंने कहा कि खराब हो चुके हार्ट वाल्व के उपचार के लिए विशेष क्लिपिंग तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में मरीज को पारंपरिक सर्जरी की तुलना में कम जोखिम का सामना करना पड़ता है और रिकवरी भी अपेक्षाकृत जल्दी होती है।
लीडलेस पेसमेकर और नई तकनीकों पर जोर
डॉ. बुडाकोटी ने बताया कि वर्तमान समय में हृदय रोगियों के लिए लीडलेस पेसमेकर लगाए जा रहे हैं। इन उपकरणों में बैटरी और तारों से जुड़ी पारंपरिक समस्याएं काफी हद तक समाप्त हो जाती हैं, जिससे मरीजों को बेहतर सुविधा मिलती है।
उन्होंने यह भी बताया कि वृद्धावस्था में कई बार बाईपास सर्जरी या स्टेंट डालना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसी परिस्थितियों में इंट्रा वैस्कुलर लिथोट्रिप्सी तकनीक का उपयोग किया जाता है। इस तकनीक के माध्यम से धमनियों में जमा कैल्शियम को तोड़कर स्टेंट सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया जा सकता है।
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गरीब मरीजों की बेहतर चिकित्सा पर जोर
IMA के अध्यक्ष डॉ. प्रवीण शर्मा ने कहा कि नई तकनीकों के आगमन से वाल्वुलर हार्ट डिजीज का उपचार पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और सरल हो गया है। उन्होंने उपस्थित चिकित्सकों से गरीब और जरूरतमंद मरीजों के प्रति संवेदनशील रहने तथा उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का संचालन IMA के वैज्ञानिक सचिव डॉ. कलीम अहमद ने किया।
बड़ी संख्या में चिकित्सक रहे मौजूद
वैज्ञानिक गोष्ठी में डॉ. नरेश नौसरान, डॉ. मोहन सिंह, डॉ. रेणू शर्मा, डॉ. मनदीप सिंह, डॉ. सुधीर अग्रवाल, डॉ. सीमा अग्रवाल, डॉ. पूनम कुमार, डॉ. विकास अग्रवाल, डॉ. रिकी चौधरी, डॉ. अंशुल गुप्ता, डॉ. पंकज खन्ना, डॉ. पूनम मखीजा, डॉ. विनिता मल्होत्रा, डॉ. शशिकांत सैनी, डॉ. स्वर्णजीत सिंह, डॉ. महेश चंद्रा, डॉ. रजनीश सिंघल, डॉ. विक्रम सिंह पुंडीर, डॉ. सुशील कुमार, डॉ. सऊद हसन, डॉ. अजय कुमार जैन, डॉ. सुभाष सहगल, डॉ. रविंद्र राणा, डॉ. सुशांत शर्मा, डॉ. अजय सिकरवार, डॉ. के.के. मक्कड़ सहित अनेक चिकित्सक उपस्थित रहे।
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