नई दिल्ली, 7 मई।
देश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत एवं डिजिटल बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने हाल ही में आयोजित राष्ट्रीय नवाचार एवं समावेशिता शिखर सम्मेलन के दौरान ‘जननी’ प्लेटफॉर्म लॉन्च किया। यह प्लेटफॉर्म गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और रिकॉर्ड प्रबंधन को आसान बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
‘जननी’ यानी प्रसवपूर्व, प्रसवोत्तर और नवजात शिशु एकीकृत देखभाल की यात्रा एक सेवा-केंद्रित डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे प्रजनन आयु की महिलाओं के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को व्यवस्थित और सुरक्षित रखने के लिए विकसित किया गया है। यह मौजूदा आरसीएच पोर्टल का उन्नत संस्करण है, जो महिलाओं और बच्चों से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाओं को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ता है।
इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से गर्भावस्था से लेकर प्रसव, नवजात शिशु की देखभाल और परिवार नियोजन तक की सभी स्वास्थ्य सेवाओं का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी अधिक प्रभावी होगी और जरूरत पड़ने पर समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना आसान होगा।
जननी प्लेटफॉर्म की खास बात यह है कि इसमें क्यूआर-कोड आधारित डिजिटल मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (एमसीएच) कार्ड जारी किए जाएंगे। इन कार्डों की मदद से लाभार्थी कहीं भी अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड तक आसानी से पहुंच सकेंगे। प्लेटफॉर्म में उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान के लिए ऑटोमेटिक अलर्ट सिस्टम भी दिया गया है, जिससे समय रहते चिकित्सकीय निगरानी सुनिश्चित की जा सकेगी।
इसके अलावा, स्वास्थ्य अधिकारियों और चिकित्सकों के लिए रियल-टाइम डैशबोर्ड की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे मरीजों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सकेगी। प्लेटफॉर्म में नियत-सूची निर्माण और निगरानी जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं, जो स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद करेंगी।
सरकार ने इस प्लेटफॉर्म को अन्य राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य योजनाओं से भी जोड़ा है। जननी को यू-विन और पोषण जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ इंटीग्रेट किया गया है, जिससे विभिन्न योजनाओं के बीच डेटा साझा करना और समन्वय स्थापित करना आसान हो जाएगा। इससे लाभार्थियों की व्यापक निगरानी संभव होगी और सेवाओं का दोहराव कम होगा।
यह प्लेटफॉर्म लाभार्थियों के पंजीकरण के लिए आभा, आधार और मोबाइल नंबर जैसे डिजिटल पहचान माध्यमों का उपयोग करता है। इसमें अखिल भारतीय खोज सुविधा भी दी गई है, जिससे प्रवासी परिवारों को भी स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता मिल सकेगी। साथ ही, लाभार्थी वेब और मोबाइल प्लेटफॉर्म के जरिए स्वयं भी अपना पंजीकरण कर सकेंगे।
जननी प्लेटफॉर्म नागरिकों को प्रसवपूर्व देखभाल, टीकाकरण और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं की समय पर जानकारी और रिमाइंडर उपलब्ध कराएगा। इसके अलावा, यह नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों की जानकारी, संभावित प्रसव स्थल और पोषण संबंधी मार्गदर्शन भी प्रदान करेगा, ताकि महिलाएं स्वास्थ्य संबंधी निर्णय बेहतर तरीके से ले सकें।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, जननी प्लेटफॉर्म मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य प्रशासन में एक बड़ा डिजिटल सुधार साबित होगा। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी, साथ ही मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में भी मदद मिलेगी।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक जननी प्लेटफॉर्म पर 1.34 करोड़ से अधिक लाभार्थियों का पंजीकरण हो चुका है। इसके अलावा 30 लाख से अधिक गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण किया गया है और 30 लाख से ज्यादा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा चुके हैं। वहीं, एक लाख से अधिक बायोमेट्रिक सत्यापन भी किए जा चुके हैं।
सरकार का मानना है कि यह प्लेटफॉर्म डिजिटल तकनीक के माध्यम से देश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।
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