सूत्रों के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया को विभिन्न माध्यमों से अंजाम दिया जाएगा, जिनमें प्रोन्नति (प्रमोशन), सीधी भर्ती, आवश्यक पदों के लिए मांग पत्र, लेखा एवं वित्त विभाग से स्वीकृति और पीएसएस संवर्ग के माध्यम से चयन शामिल हैं। उन्होंने बताया कि कई पदों के लिए मांग पत्र पहले ही भेजे जा चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने जताई भर्ती में तेजी की आवश्यकता
आयुष विभाग (AYUSH recruitment in UP) के प्रमुख सचिव रंजन कुमार ने बताया कि हाल ही में हुई विभागीय बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “राज्य में पारंपरिक चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए यह भर्ती बेहद आवश्यक है।”
प्रमुख सचिव ने बताया कि निदेशक, उपनिदेशक, प्राचार्य, प्रोफेसर, प्रवक्ता, चिकित्सा अधिकारी, स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट, मैट्रन और रीडर जैसे महत्वपूर्ण पदों को भरने की तैयारी चल रही है।
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AYUSH: विभागवार रिक्त पदों का ब्यौरा
- आयुर्वेद विभाग में कुल 7,233 स्वीकृत पदों में से 4,208 पद भरे गए हैं, जबकि 3,025 पद रिक्त हैं।
- यूनानी विभाग में 462 पदों में से 161 पद रिक्त हैं।
- होम्योपैथी विभाग में 3,818 स्वीकृत पदों में से 1,164 पद खाली हैं।
प्रमुख सचिव ने बताया कि इन रिक्तियों को भरने के लिए विभिन्न स्तरों पर भर्तियों की योजना बनाई जा रही है।
आधुनिकीकरण की दिशा में कदम
सूत्रों ने बताया कि योगी सरकार आयुष चिकित्सा प्रणाली (AYUSH recruitment in UP) के ढांचे को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा, “पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। नए आयुष कॉलेजों की स्थापना, पाठ्यक्रमों का विस्तार और डिजिटल स्वास्थ्य समाधान का समावेश किया गया है।”
उन्होंने बताया कि पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए प्रयास जारी हैं। “टेलीमेडिसिन, डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड और आधुनिक शोध केंद्रों जैसी पहल की जा रही हैं। इसके अलावा, आयुर्वेद और होम्योपैथी को युवाओं के लिए एक आकर्षक करियर विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है,” उन्होंने कहा।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा बल
सूत्रों ने बताया कि यह भर्ती अभियान न केवल राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाएगा बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी खोलेगा। “यह पहल एक सशक्त और स्वस्थ उत्तर प्रदेश की दिशा में बड़ा कदम है, जो पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देकर समूची स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूती प्रदान करेगी।

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