नई दिल्ली, 1 अगस्त 2026
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री JP Nadda ने देशभर के अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में Project Saarthi के विस्तार की संभावनाओं का आकलन करने के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में श्रम एवं रोजगार तथा युवा मामले एवं खेल मंत्री Dr. Mansukh Mandaviya भी मौजूद रहे। इस दौरान PGIMER Chandigarh में लागू Project Saarthi के प्रभाव और कार्यप्रणाली की समीक्षा की गई। साथ ही केंद्रीय सरकारी अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में इस मॉडल को लागू करने के लिए व्यापक और टिकाऊ ढांचा तैयार करने पर चर्चा हुई। इस पहल का उद्देश्य प्रशिक्षित युवा स्वयंसेवकों के माध्यम से मरीजों के अनुभव को बेहतर बनाना और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करना है।
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मरीजों को कैसे मिल रही है मदद?
बैठक में JP Nadda ने कहा कि मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाएं केवल इलाज तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों को समय पर मार्गदर्शन, सहायता और सहयोग उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि Project Saarthi ने यह साबित किया है कि सुनियोजित स्वयंसेवी सहयोग से मरीजों की सुविधा बढ़ाई जा सकती है और डॉक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों को अपनी चिकित्सीय जिम्मेदारियों पर अधिक प्रभावी ढंग से ध्यान देने का अवसर मिलता है। PGIMER Chandigarh में स्वयंसेवक मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने, व्हीलचेयर और स्ट्रेचर उपलब्ध कराने, जांच केंद्रों तक मार्गदर्शन देने तथा अन्य गैर-चिकित्सीय सहायता प्रदान कर रहे हैं।
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2,500 Volunteers, 1.5 लाख घंटे की सेवा
बैठक में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार PGIMER Chandigarh में अब तक 2,500 से अधिक Volunteers इस पहल से जुड़ चुके हैं, जिन्होंने 1.5 लाख घंटे से अधिक सेवा प्रदान की है। Community Medicine Department द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि Project Saarthi की सहायता प्राप्त मरीजों के अस्पताल तक पहुंचने में लगने वाले कुल समय में 26% की कमी दर्ज की गई। सरकार का मानना है कि इस मॉडल को अन्य सरकारी अस्पतालों में लागू करने से मरीजों को बेहतर अनुभव मिलेगा और अस्पतालों की कार्यप्रणाली भी अधिक व्यवस्थित हो सकेगी।
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My Bharat के साथ Integration पर जोर
बैठक में Project Saarthi को युवा मामले एवं खेल मंत्रालय की My Bharat Initiative के साथ जोड़ने पर भी विस्तार से चर्चा हुई। स्वयंसेवकों के पंजीकरण, प्रशिक्षण, उपस्थिति, मरीजों की प्रतिक्रिया और ABHA ID निर्माण जैसी प्रक्रियाओं में Digital Platform के उपयोग को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया। इसके अलावा स्वयंसेवकों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश, सुरक्षा उपाय और संस्थागत व्यवस्था विकसित करने पर भी विचार हुआ, ताकि वे केवल मरीज सहायता से जुड़े कार्य करें और किसी भी प्रकार की चिकित्सीय या प्रशासनिक जिम्मेदारी न संभालें। बैठक में स्वास्थ्य मंत्रालय, युवा मामले एवं खेल मंत्रालय तथा विभिन्न केंद्रीय अस्पतालों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
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दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB )
सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।
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