नई दिल्ली, 31 जुलाई 2026
PM Surakshit Matritva Abhiyan (PMSMA) के तहत वर्ष 2016 से अब तक 7.91 करोड़ से अधिक Pregnant Women को मुफ्त प्रसवपूर्व देखभाल (ANC) सेवाएं प्रदान की गई हैं। इस दौरान 1.24 करोड़ से अधिक High-Risk Pregnancies (HRP) की पहचान की गई है, जिससे समय पर इलाज और निगरानी संभव हो सकी। सरकार के अनुसार, अभियान का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित मातृत्व सेवाएं उपलब्ध कराना और जटिल गर्भावस्थाओं की समय रहते पहचान कर आवश्यक उपचार सुनिश्चित करना है। यह जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने लोकसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से दी।
MMR और ANC में दर्ज हुआ सुधार
सरकार के अनुसार Sample Registration System (SRS) के आंकड़ों में भारत का Maternal Mortality Ratio (MMR) वर्ष 2014-16 के 130 से घटकर 2022-24 में 87 प्रति एक लाख जीवित जन्म हो गया है। यानी इसमें 43 अंकों की कमी दर्ज की गई। वहीं NFHS-6 (2023-24) के अनुसार पहली तिमाही में ANC Registration बढ़कर 76.2% हो गया, जो NFHS-4 (2015-16) में 58.6% था। इसके अलावा चार या उससे अधिक ANC Check-up कराने वाली महिलाओं का प्रतिशत 51.2% से बढ़कर 65.2% और Institutional Delivery का आंकड़ा 78.9% से बढ़कर 90.6% तक पहुंच गया।
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High-Risk Pregnancy पर विशेष फोकस
सरकार ने बताया कि PMSMA के तहत हर महीने की 9 तारीख को नामित सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं को मुफ्त जांच, दवाएं, Ultrasound, लैब जांच और विशेषज्ञ परामर्श उपलब्ध कराया जाता है। High-Risk Pregnancy (HRP) की शीघ्र पहचान के बाद महिलाओं की नाम-आधारित ट्रैकिंग, अतिरिक्त ANC Check-up, SMS Alert, समय पर रेफरल और प्रसव के 45 दिन बाद तक निगरानी की व्यवस्था की गई है। साथ ही फॉलोअप जांच के लिए मुफ्त परिवहन प्रोत्साहन और निकटतम First Referral Unit (FRU) से भी जोड़ा जाता है, ताकि जटिल मामलों में समय पर इलाज सुनिश्चित हो सके।
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Private Doctors और Digital System की मदद
सरकार ने अभियान को मजबूत बनाने के लिए Private Gynecologists, स्वयंसेवी डॉक्टरों और IMA तथा FOGSI जैसे संगठनों की भागीदारी बढ़ाई है। इसके लिए ‘I Pledge For 9’ Achievers Awards और एक केंद्रीकृत PMSMA Portal भी बनाया गया है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में सेवा पहुंचाने के लिए e-PMSMA के तहत अतिरिक्त सत्र, डिजिटल ट्रैकिंग, स्वास्थ्य कर्मियों का प्रशिक्षण, रेफरल नेटवर्क, ASHA Workers को प्रोत्साहन और नियमित IEC व BCC Campaign चलाए जा रहे हैं। सरकार का कहना है कि इन उपायों से सुरक्षित मातृत्व सेवाओं की पहुंच और प्रभावशीलता में लगातार सुधार हो रहा है
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दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB )
सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।
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