बिहार, 31 जुलाई 2026
बिहार के RDJM Medical College and Hospital एक बार फिर चर्चा में है। आरोप है कि कॉलेज प्रशासन ने MBBS छात्रों को Internship शुरू करने से पहले ₹3.75 लाख Hostel Fee जमा करना अनिवार्य कर दिया है। इस मामले को लेकर एक Doctors Body ने गंभीर आपत्ति जताते हुए इसे National Medical Commission (NMC) के नियमों का उल्लंघन बताया है। संगठन का कहना है कि छात्रों पर Internship से पहले इतनी बड़ी राशि जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है, जबकि हाल के NMC निर्देश मेडिकल कॉलेजों द्वारा Internship से जुड़ी अतिरिक्त या अनुचित फीस वसूलने और गैर-पारदर्शी शुल्क व्यवस्था को लेकर स्पष्ट रुख अपनाते हैं।
Doctors Body ने NMC से की हस्तक्षेप की मांग
Doctors Body ने आरोप लगाया है कि छात्रों को Internship से पहले भारी Hostel Fee जमा करने के लिए कहा जा रहा है और इस मामले में NMC से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन का कहना है कि मेडिकल शिक्षा से जुड़े सभी शुल्क पहले से घोषित और पारदर्शी होने चाहिए तथा छात्रों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं डाला जाना चाहिए। हाल ही में NMC ने भी मेडिकल कॉलेजों को निर्देश दिया है कि वे फीस संरचना सार्वजनिक करें और किसी भी प्रकार की अप्रकाशित या अनधिकृत फीस वसूली से बचें। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, इस मामले में कॉलेज प्रशासन की ओर से उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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NMC नियमों में क्या कहा गया है?
हाल के NMC Public Notice के अनुसार, मेडिकल कॉलेजों को केवल स्वीकृत और घोषित फीस ही लेने की अनुमति है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि MBBS का शैक्षणिक पाठ्यक्रम 4.5 वर्ष का होता है, जबकि एक वर्ष की Compulsory Rotating Medical Internship (CRMI) अलग चरण है। NMC ने मेडिकल कॉलेजों को Internship अवधि से संबंधित अनुचित शुल्क वसूली और पूरी 5 या 5.5 वर्ष की फीस एक साथ लेने जैसी प्रथाओं से बचने की सलाह दी है। आयोग ने यह भी कहा है कि फीस संरचना पारदर्शी, उचित और गैर-शोषणकारी होनी चाहिए। इसी आधार पर Doctors Body का दावा है कि RDJM Medical College की कथित Hostel Fee नीति की जांच आवश्यक है।
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जांच और जवाब का इंतजार
यह मामला मेडिकल छात्रों के आर्थिक हितों और मेडिकल कॉलेजों की फीस नीति पर नई बहस खड़ी कर रहा है। फिलहाल Doctors Body ने NMC से पूरे मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। दूसरी ओर, उपलब्ध जानकारी के अनुसार कॉलेज प्रशासन का विस्तृत आधिकारिक पक्ष अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है। ऐसे में इस विवाद पर अंतिम स्थिति जांच और संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल कॉलेजों में फीस संबंधी नियमों का पारदर्शी पालन छात्रों और संस्थानों दोनों के हित में है।
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दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB )
सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।
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