नई दिल्ली, 5 अगस्त 2026
Dialysis Negligence Case में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए Consumer Court ने Hospital और इलाज करने वाले Cardiologist को मरीज के परिजनों को ₹99 लाख Compensation देने का आदेश दिया है। आयोग ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई पर्याप्त मेडिकल साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो सके कि Cardiac Complications से जूझ रहे मरीज को Dialysis देना चिकित्सकीय रूप से आवश्यक था। आयोग ने उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड का मूल्यांकन करने के बाद यह आदेश पारित किया।
Dialysis के पक्ष में पर्याप्त रिकॉर्ड नहीं मिला
सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि Hospital उपचार के समर्थन में आवश्यक मेडिकल रिकॉर्ड और समकालीन दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। आदेश में कहा गया कि मरीज को Dialysis देने से पहले किसी Nephrologist की स्पष्ट सलाह या ऐसा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया, जो इस निर्णय को उचित ठहरा सके। आयोग ने यह भी माना कि इलाज से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए, जिससे मामले में प्रतिकूल निष्कर्ष निकालना उचित था। हालांकि आयोग ने यह भी दोहराया कि केवल मरीज की मृत्यु या जटिलता अपने आप में मेडिकल लापरवाही साबित नहीं करती।
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Cardiac Condition बना मामले का अहम पहलू
आयोग के अनुसार रिकॉर्ड में मरीज की गंभीर Cardiac Condition का उल्लेख था, लेकिन इसके बावजूद Dialysis करने के निर्णय के समर्थन में पर्याप्त चिकित्सकीय आधार नहीं दिखाया गया। फैसले में कहा गया कि Hospital यह साबित करने में विफल रहा कि उपचार उस स्तर का था जिसकी अपेक्षा एक सक्षम मेडिकल प्रोफेशनल से की जाती है। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के मेडिकल नेग्लिजेंस से जुड़े विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि हर असफल उपचार लापरवाही नहीं होता, लेकिन जब आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध न कराया जाए तो परिस्थितियों के आधार पर निष्कर्ष निकाला जा सकता है।
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₹99 लाख Compensation देने का आदेश
मामले की सुनवाई के बाद Consumer Court ने Hospital और संबंधित Cardiologist को संयुक्त रूप से ₹99 लाख Compensation अदा करने का निर्देश दिया। यह आदेश आयोग द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों, मेडिकल रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद दिया गया। फिलहाल यह फैसला संबंधित पक्षों के लिए महत्वपूर्ण कानूनी विकास माना जा रहा है। यदि आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय या अन्य सक्षम मंच पर अपील की जाती है, तो मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रह सकती है।
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दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB )
सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।
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