2025 Rules पर कोर्ट की टिप्पणी
Division Bench ने कहा कि केवल नियमों को चुनौती देने के आधार पर अंतरिम राहत नहीं दी जा सकती। अदालत के अनुसार, यदि याचिकाकर्ताओं को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाती, तो इससे 2025 के Training Rules का प्रभाव अस्थायी रूप से समाप्त हो जाता, जबकि इन नियमों की वैधता को लेकर मामला अभी Armed Forces Tribunal (AFT) में लंबित है। इसी आधार पर High Court ने AFT के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
याचिकाकर्ताओं ने क्या दलील दी?
दोनों Army Doctors ने अदालत में कहा कि वर्ष 2018 के नियमों के तहत उन्हें सेवा के 4 से 10 वर्ष के भीतर NEET PG देने का अवसर मिलता था। हालांकि, 2025 के संशोधित नियमों में यह अवधि घटाकर 4 से 7 वर्ष कर दी गई है। उन्होंने तर्क दिया कि संशोधित नियमों के कारण उनकी पात्रता प्रभावित हुई है और NEET PG 2026 के आवेदन की अंतिम तिथि से पहले उन्हें परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी जानी चाहिए।
कोर्ट ने राहत देने से क्यों किया इनकार?
High Court ने कहा कि दोनों अधिकारी क्रमशः वर्ष 2017 और 2018 से सेवा में हैं और चार वर्ष पूरे होने के बाद उन्हें पहले भी NEET PG परीक्षा देने का अवसर मिल चुका था। अदालत ने AFT की इस टिप्पणी से सहमति जताई कि याचिकाकर्ताओं को पहले सीट न मिलना उनकी व्यक्तिगत पसंद या परीक्षा प्रक्रिया में सफल न होने का परिणाम था। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि AFT में उनका मामला अंततः उनके पक्ष में जाता है, तो वे वर्ष 2028 तक परीक्षा में शामिल होने के पात्र रहेंगे। फिलहाल, अदालत ने किसी भी प्रकार की अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।NMC ने बदल दिया Appeal Process, अब Medical Colleges के लिए क्या हुआ अनिवार्य?
दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB ) सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।

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