राज्यसभा में सरकार का जवाब
राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने बताया कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और ड्रग्स रूल्स, 1945 के तहत आयुर्वेद, सिद्ध, सोवा-रिग्पा, यूनानी और होम्योपैथी दवाओं के लिए विशेष नियामक प्रावधान लागू हैं। इन नियमों के अनुसार दवा निर्माताओं को उत्पादन से पहले निर्धारित लाइसेंसिंग शर्तों का पालन करना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के ड्रग इंस्पेक्टर समय-समय पर निर्माण इकाइयों और दवा दुकानों से नमूने लेकर गुणवत्ता परीक्षण कराते हैं। यदि कोई दवा निर्धारित मानकों पर खरी नहीं उतरती है, तो संबंधित निर्माता या विक्रेता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती है।
सीडीएससीओ में विशेष आयुष वर्टिकल
मंत्री ने कहा कि आयुष दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (सीडीएससीओ) में एक विशेष आयुष वर्टिकल भी स्थापित किया गया है। वहीं, क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया की तृतीय-पक्ष मूल्यांकन प्रणाली के तहत पात्र उत्पादों को 'आयुष स्टैंडर्ड' और 'आयुष प्रीमियम' प्रमाणपत्र दिए जाते हैं।आयुष औषधि गुणवत्ता एवं उत्पादन संवर्धन योजना
उन्होंने बताया कि मंत्रालय 'आयुष औषधि गुणवत्ता एवं उत्पादन संवर्धन योजना' भी चला रहा है, जिसका उद्देश्य है:- दवाओं का मानकीकरण
- गुणवत्ता आधारित उत्पादन
- मजबूत परीक्षण व्यवस्था
- नियामक ढांचे को सुदृढ़ करना
- सुरक्षा निगरानी बढ़ाना
- भ्रामक विज्ञापनों पर नियंत्रण
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एआईआईए बनी नोडल एजेंसी
इसके अलावा, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) को आयुष दवाओं से जुड़े भ्रामक विज्ञापनों के मामलों में डिजिटल और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को नोटिस जारी करने के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है।ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के लिए नए निर्देश
सरकार ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को भी निर्देश दिए हैं कि जहां प्रिस्क्रिप्शन आवश्यक हो, वहां केवल पंजीकृत आयुर्वेद, सिद्ध या यूनानी चिकित्सक द्वारा जारी वैध पर्चा अपलोड किए जाने के बाद ही आयुष दवाओं की बिक्री की अनुमति दी जाए। मंत्रालय के अनुसार, उसके अधीन सभी अनुसंधान परिषदें और राष्ट्रीय संस्थान सूचना, शिक्षा एवं संचार गतिविधियों, शोध पत्रिकाओं, जनजागरूकता कार्यक्रमों, प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से आयुष पद्धतियों और उत्पादों से संबंधित प्रमाण-आधारित जानकारी लोगों तक पहुंचा रहे हैं।मुख्य बातें (Key Highlights)
- 'Ayush Suraksha Portal' से भ्रामक विज्ञापनों की रियल-टाइम निगरानी होगी।
- गुणवत्ता मानकों पर खरी न उतरने वाली दवाओं पर कानूनी कार्रवाई होगी।
- सीडीएससीओ में विशेष आयुष वर्टिकल स्थापित किया गया।
- ई-कॉमर्स पर प्रिस्क्रिप्शन वाली आयुष दवाओं की बिक्री के लिए वैध पर्चा अनिवार्य होगा।
- एआईआईए को भ्रामक ऑनलाइन विज्ञापनों के खिलाफ कार्रवाई के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया।
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दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB ) सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।

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