“विकसित भारत की ओर भारत की यात्रा का वित्तपोषण” पर सम्मेलन का आज नई दिल्ली में समापन हुआ
पहला दिन व्यापक आर्थिक प्राथमिकताओं, बचत, निवेश और राजकोषीय लचीलेपन पर केंद्रित रहा; दूसरा दिन कृषि परिवर्तन, ऊर्जा स्थानांतरण पर केंद्रित रहा जिसमें इसमें प्रौद्योगिकी की भूमिका, बैंकिंग और जीएसडीपी को मापने के पहलुओं पर संक्षिप्त सत्र शामिल थे
नई दिल्ली में आज राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्रियों, वित्त सचिवों, विधानमंडल सदस्यों, शिक्षाविदों, उद्योग, बैंकिंग और नीति निर्माण से जुड़े विशेषज्ञों के साथ "भारत की विकसित भारत यात्रा के वित्तपोषण" विषय पर आयोजित सम्मेलन का समापन हुआ। दो दिवस तक चले इस सम्मेलन में भारत की वित्तीय जरूरतों और सतत, समावेशी तथा व्यापक विकास के मार्गों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।
दो दिवसीय सम्मेलन में केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री ने भाग लिया और इसमें असम, दिल्ली, गोवा, हरियाणा, जम्मू और कश्मीर, केरल, मणिपुर, मेघालय और नगालैंड के मुख्यमंत्री; अरुणाचल प्रदेश, बिहार और ओडिशा के उपमुख्यमंत्री; और आंध्र प्रदेश, असम, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री, साथ ही राज्यों और वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
प्रथम दिवस, वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग (डीईए) सचिव श्रीमती अनुराधा ठाकुर ने उद्घाटन सत्र में प्रतिभागियों का स्वागत किया और प्रसंग प्रस्तुत किया।
श्रीमती ठाकुर ने इस विषय पर प्रकाश डाला कि अपनी तरह का यह पहला सम्मेलन एक दीर्घकालिक और व्यापक दृष्टिकोण रखता है, जिसमें सार्वजनिक और निजी वित्त से संबंधित मुद्दों को एक साथ लाया गया है। शिक्षा, उद्योग, बैंकिंग और नीति निर्माण से जुड़े विशेषज्ञों को एक साथ रखते हुए राज्यों ने अपने विचार साझा किए और इस विषय पर बल दिया कि विकसित भारत की यात्रा केंद्र और राज्यों के बीच गहन पूरकता और बहुस्तरीय साझेदारी पर आधारित है। उन्होंने उल्लेख किया कि व्यापक आर्थिक स्थिरता और राजकोषीय विवेक को वैश्विक मान्यता मिली है, जिसमें पिछले 16-17 महीनों में प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों की ओर से चार बार सॉवरेन रेटिंग में सुधार शामिल है, जिसमें हाल ही में जेसीआर ने भारत को एक पायदान ऊपर उठाकर बीबीबी+ से ए- कर दिया है।
डीईए सचिव ने इस विषय पर जोर दिया कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु जरूरी बदलाव केवल सरकारी बजट से ही संभव नहीं है। निजी क्षेत्र का वित्तपोषण, नवोन्मेषी वित्तपोषण तंत्र और सरकार के कई स्तरों पर मजबूत सहयोग इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
उन्होंने सभा को सूचित किया कि राज्यों की भागीदारी वाले कार्य समूह विषयगत विचार-विमर्श को आगे बढ़ाएंगे और क्षेत्रीय वित्तपोषण आवश्यकताओं और कार्रवाई योग्य सिफारिशों की पहचान करेंगे।
महाराष्ट्र सरकार के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री सुधीर श्रीवास्तव ने उद्घाटन सत्र में राज्यों के वित्तपोषण स्वरूप पर एक प्रस्तुति दी।
अपने प्रमुख भाषण में, आर्थिक विकास संस्थान के अध्यक्ष और लाइफ ट्रस्टी तथा 15वें वित्त आयोग (एक्सवीएफसी) के अध्यक्ष श्री एन. के. सिंह ने भारत की मजबूत व्यापक आर्थिक नींव पर प्रकाश डाला और वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत जीडीपी की बढ़ोतरी तथा जापान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी की ओर से हाल ही में रेटिंग को बीबीबी+ से ए- में अपग्रेड किए जाने का उल्लेख किया।
उन्होंने इस विषय पर जोर दिया कि भारत की सकल घरेलू बचत दर, जो वर्तमान में जीडीपी की लगभग 34 प्रतिशत है, को विकसित भारत के लिए आवश्यक 7-8 प्रतिशत की वृद्धि दर को बनाए रखने के लिए 38-40 प्रतिशत तक बढ़ाने की जरूरत है। राजकोषीय स्थिरता पर, श्री सिंह ने राज्यवार कर्ज की स्थिरता आकलन की वकालत की और गैर-बजट उधार, गारंटी, बकाया और राज्य के स्वामित्व वाली संस्थाओं के माध्यम से लिए गए उधारों के लेखांकन सहित अधिक राजकोषीय पारदर्शिता पर बल दिया। राजस्व जुटाने पर, उन्होंने कहा कि टैक्स दरों को बढ़ाने के बजाय सूचना का लाभ उठाने में ही सबसे बड़ा अवसर छिपा है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और मशीन लर्निंग, मौजूदा कर डेटाबेस के साथ मिलकर, अनुपालन संबंधी कमियों की पहचान करने, प्रभावी कर आधार को व्यापक बनाने और राजस्व जुटाने में सुधार करने में मदद कर सकते हैं। श्री सिंह ने सार्वजनिक वित्त से निजी पूंजी की ओर बढ़ने की जरूरत पर बल दिया, जिसमें सार्वजनिक संसाधन उत्प्रेरक की भूमिका निभाएंगे। उन्होंने घरेलू और विदेशी निवेश को आसान बनाने के लिए पूर्वानुमानित नियमों, लागू करने योग्य अनुबंधों, त्वरित विवाद समाधान और मजबूत निवेश संधियों पर भी बल दिया। कारक-बाजार सुधारों पर, श्री सिंह ने पूंजी, श्रम और भूमि को महत्वपूर्ण क्षेत्रों के रूप में पहचाना, पूंजी की हमारी अपेक्षाकृत उच्च लागत पर प्रकाश डाला, कौशल विकास, शिक्षुता और मजबूत विश्वविद्यालय-उद्योग संबंधों के माध्यम से श्रम उत्पादकता पर जोर दिया, और राज्यों से भूमि उपयोग दक्षता में सुधार करने, अनुमोदन को सुव्यवस्थित करने और डिजिटल भूमि अभिलेखों को मजबूत करने का आग्रह किया।
प्रथम विषयगत सत्र, "मैक्रोइकॉनॉमिक निरीक्षण”, का संचालन भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री अजय सेठ ने किया। जेपी मॉर्गन के प्रबंध निदेशक और मुख्य भारतीय अर्थशास्त्री तथा प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद (पीएम-ईएसी) के अंशकालिक सदस्य डॉ. सज्जिद जेड. चिनॉय ने इस विषयगत सत्र में मुख्य भाषण दिया।
पैनल ने तीन विषयों पर विचार-विमर्श किया: "विकसित भारत 2047 के लिए बचत और निवेश दरों को बढ़ाना," जिसे सिटीबैंक में भारत के मुख्य अर्थशास्त्री डॉ. समीरन चक्रवर्ती ने प्रस्तुत किया; “नए वित्त की ओर से सुगम राज्य स्तर पर राजकोषीय स्वर्णिम नियम," जिसे मुंबई के इंदिरा गांधी विकास अनुसंधान संस्थान में प्रोफेसर आशिमा गोयल ने संबोधित किया; और "राजकोषीय लचीलापन सुधारने और संसाधन जुटाने के लिए सार्वजनिक वित्त को मजबूत करना," जिस पर मद्रास स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के निदेशक प्रोफेसर एन. आर. भानुमूर्ति ने चर्चा की।
एक विशेष सत्र में कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक और गैर-कार्यकारी निदेशक श्री उदय कोटक ने हिस्सा लिया।
दूसरे दिन की शुरुआत कृषि क्षेत्र के परिवर्तन के वित्तपोषण पर एक सत्र से हुई, जिसका संचालन कृषि विभाग के पूर्व सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी ने किया। मुख्य भाषण एमसीएक्स के जनहित निदेशक और अध्यक्ष डॉ. हर्ष कुमार भानवाला ने दिया।
इस पैनल ने श्री अनिल कुमार एसजी, संस्थापक और गैर-कार्यकारी अध्यक्ष, समुन्नति के साथ "बाजार पहुंच और विश्वसनीय कृषि वित्तपोषण" पर; डॉ. शौमित्र चटर्जी, सहायक प्रोफेसर, जॉन्स हॉपकिंस विश्वविद्यालय, यूएसए के साथ "फसल कटाई के बाद मार्केटिंग, लॉजिस्टिक सहायता, इंफ्रास्ट्रक्चर और खाद्य प्रसंस्करण में मुद्दे" पर; और डॉ. मार्क डी सूसा शील्ड, कंट्री डायरेक्टर और प्रमुख, दक्षिण एशिया समूह, अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष (आईएफएडी) के साथ "कृषि में बदलाव के संदर्भ में विस्तारित किए जा सकने वाले या खोजे जाने की जरूरतों वाले वित्तीय साधनों पर आईएफएडी का अनुभव" पर चर्चा की।
तीसरे सत्र, "ऊर्जा स्थानांतरण का वित्तपोषण" का संचालन विद्युत मंत्रालय के पूर्व सचिव श्री आलोक कुमार ने किया। इस सत्र में प्रधानमंत्री के सलाहकार श्री तरुण कपूर ने मुख्य भाषण दिया।
पैनलिस्ट्स ने "नवीकरणीय ऊर्जा और ट्रांसमिशन परिसंपत्तियों का वित्तपोषण" विषय पर प्रस्तुतियां दीं, जिसमें इंडिग्रिड के प्रबंध निदेशक श्री हर्ष शाह ने प्रस्तुति दी; "बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (बीईएसएस), पंप स्टोरेज परियोजनाओं (पीएसपी) और अन्य ऊर्जा भंडारण समाधानों का वित्तपोषण" विषय पर प्रस्तुतियां दीं, जिसमें टाटा पावर के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. प्रवीर सिन्हा ने प्रस्तुति दी; और "कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन और स्टोरेज (सीसीयूएस) का वित्तपोषण और देश के एनडीसी लक्ष्यों के लिए प्राथमिकता सुनिश्चित करने हेतु कार्बन क्रेडिट फ्रेमवर्क का डिजाइन" विषय पर प्रस्तुतियां दीं, जिसमें विश्व बैंक के दक्षिण एशिया क्षेत्र के ऊर्जा और खनन क्षेत्रों के प्रैक्टिस मैनेजर और प्रमुख श्री राहुल किचलू ने प्रस्तुति दी।
सभी सत्रों में राज्य सरकारों की ओर से अपने अनुभव साझा किए गए, जिससे वित्तपोषण प्राथमिकताओं और चुनौतियों पर दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान करने का अवसर मिला।
विशेष सत्र
दो विशेष सत्रों में भारत की विकास यात्रा के उभरते आयामों पर चर्चा की गई। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) सचिव डॉ. सौरभ गर्ग ने "भारत की विकसित भारत यात्रा का मापन: सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) परिप्रेक्ष्य" विषय पर प्रस्तुति दी; और इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एम. ई. आई. टी. वाई.) सचिव श्री एस. कृष्णन ने "भारत की विकसित भारत यात्रा में नई युग की प्रौद्योगिकी की भूमिका" पर बात की।
समापन सत्र के दौरान अपने संबोधन में भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि इस सम्मेलन ने केंद्र और राज्यों को संसाधन निर्माण और बंटवारे पर चर्चा से आगे बढ़कर अगले दो दशकों में भारत के विकास के वित्तपोषण पर सामूहिक तौर पर विचार-विमर्श करने का एक मूल्यवान अवसर प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि चर्चाओं की गुणवत्ता और राज्यों की ओर से अपने दृष्टिकोणों को खुलेपन से साझा करने से इस सम्मेलन को वार्षिक रूप से आयोजित करने का मजबूत आधार तैयार हुआ है। उन्होंने इस विषय पर जोर दिया कि हालांकि भारत का बचत आधार काफी है और इसे और बढ़ाने की जरूरत होगी, फिर भी विकसित भारत के लिए आवश्यक निवेश जुटाने के लिए निजी पूंजी की अधिक भागीदारी अनिवार्य होगी।
उन्होंने राज्यों के लिए तीन प्राथमिकताएं: प्रभावी एकल-खिड़की मंजूरी के माध्यम से भूमि, बिजली और लॉजिस्टिक्स की उपलब्धता सुनिश्चित करके निजी निवेश के लिए अनुकूल वातावरण बनाना; मजबूत परियोजना-तैयारी प्रक्रियाओं और विश्वसनीय परियोजना रिपोर्टों के माध्यम से निवेश की गुणवत्ता में सुधार करना जिससे घरेलू और बहुपक्षीय वित्त तक पहुंच सुगम हो सके, साथ ही विकास क्षमता वाले कम सुविधा प्राप्त जिलों की ओर क्रेडिट निर्देशित किया जा सके; और राजकोषीय बाधाओं के बावजूद राज्यों के अपने पूंजीगत खर्च को मजबूत करना, बताईं। इस संदर्भ में, उन्होंने श्री सुधीर श्रीवास्तव के उस प्रस्ताव का उल्लेख किया जिसमें 2031-32 तक पूंजीगत खर्च को सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के लगभग 2.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 3 प्रतिशत करने की बात कही गई है।
“विकसित भारत की निर्भरत विकसित राज्यों पर है” इस विषय पर जोर देते हुए, डॉ. नागेश्वरन ने राज्यों की ओर से साझा की गई प्रथाओं, चल रहे उदारीकरण प्रयासों और विशेषज्ञ अनुशंसाओं को आगे बढ़ाने और स्पष्ट जिम्मेदारियों और समयसीमाओं के साथ साझेदारियों में परिणत करने का आह्वान किया। उन्होंने भारत के समक्ष दोहरी अनिवार्यता: 2047 तक दीर्घकालिक विकास यात्रा को बनाए रखना और अगले पांच वर्ष में संसाधनों को जुटाने में तेजी लाना, जब वैश्विक वित्तपोषण के अवसर उपलब्ध हैं; को रेखांकित करते हुए अपना भाषण समाप्त किया।
भारतीय स्टेट बैंक के अध्यक्ष श्री चल्ला श्रीनिवासुलु शेट्टी ने दो दिवसीय सम्मेलन के समापन सत्र में "बैंकिंग क्षेत्र से वित्त के स्रोत" विषय पर संबोधित किया।
Union Minister for Finance & Corporate Affairs Smt. @nsitharaman attends the inaugural session of the conference of State Finance Ministers and Finance Secretaries of States and Union Territories with Legislature on “Financing India’s Journey towards Viksit Bharat”, in New Delhi,… pic.twitter.com/kEsYJKyPK1
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Smt. Anuradha Thakur, Secretary, Department of Economic Affairs (DEA) @FinMinIndia, addressed the participants and set the context in the inaugural session of the Conference of State Finance Ministers & Finance Secretaries of States/UTs with Legislature on “Financing India’s… pic.twitter.com/gDvDxBCyyl
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Shri N. K. Singh, President and Life Trustee, Institute of Economic Growth, and Chairman, 15th Finance Commission (XVFC), delivered the keynote address at the Conference of State Finance Ministers and Finance Secretaries of States and Union Territories with Legislature on… pic.twitter.com/QGcf6BwNEf
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Today marked the conclusion of first meeting of the Conference of State Finance Ministers and Finance Secretaries of States/UTs with Legislature on the theme “Financing India’s Journey towards Viksit Bharat.”
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The conference featured insightful deliberations by eminent experts,… pic.twitter.com/X01CTxQZuL
After attending the Conference on “Financing India’s Journey towards Viksit Bharat” in New Delhi, Shri Brijendra Prasad Yadav, Minister for Commercial Taxes and Finance, Bihar, shared his experience in person:
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“The Prime Minister’s vision of a developed India by 2047 encompasses… pic.twitter.com/yQssGUXlZp
Watch Shri Rajesh Dharmani, Minister of Technical Education, Vocational & Industrial Training, Himachal Pradesh, share his experience after attending the Conference on “Financing India’s Journey towards Viksit Bharat” in New Delhi:
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It was a great experience, and I commend the… pic.twitter.com/Wrb9P4x1Xd
Shri Kanubhai Desai, Minister of Finance, Urban Development and Urban Housing, Gujarat, shares his experience after attending the Conference on “Financing India’s Journey towards Viksit Bharat” in New Delhi:
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"All states appreciated the initiative taken by the Union Finance… pic.twitter.com/Rgyee9bdyT
Watch Shri @ChownaMeinBJP, Deputy Chief Minister and Minister of Finance, Arunachal Pradesh, share his experience after attending the Conference on “Financing India’s Journey towards Viksit Bharat” in New Delhi:
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Since yesterday, we have been discussing the financing of India's… pic.twitter.com/zoPjpuKE8K
Shri @swapan55, Minister of Finance, West Bengal, shares his experience after attending the Conference on “Financing India’s Journey towards Viksit Bharat” in New Delhi:
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The two-day conference on financing Viksit Bharat was very instructive. See, it's not normally the case that… pic.twitter.com/QPsw0vrKXI
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