नई दिल्ली, 3 अप्रैल।
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल (आरएमएल) में डॉक्टरों की टीम ने एक बेहद जटिल और दुर्लभ हृदय सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर चिकित्सा क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
अटल बिहारी वाजपेयी आयुर्विज्ञान संस्थान (एबीवीआईएमएस) और आरएमएल अस्पताल के निदेशक डॉ. अशोक कुमार ने इस उपलब्धि को संस्थान के लिए गर्व का क्षण बताया। टीम का नेतृत्व डॉ. नरेंद्र सिंह झाझरिया ने किया।
दुर्लभ बीमारी, जटिल चुनौती
31 वर्षीय महिला ‘साइटस इन्वर्सस’ नामक दुर्लभ स्थिति से पीड़ित थी, जिसमें शरीर के सभी अंग सामान्य स्थिति के उलट (मिरर इमेज) होते हैं—दिल दाईं ओर, लिवर बाईं ओर, प्लीहा दाईं ओर और पेट भी दाईं ओर। इसके साथ ही मरीज को जन्मजात हृदय रोग ‘आंशिक एट्रियोवेंट्रिकुलर (AV) कैनाल दोष’ भी था, जिससे रक्त का असामान्य मिश्रण हो रहा था।
4 सेंटीमीटर के छोटे चीरे से विश्वस्तरीय सर्जरी
डॉक्टरों ने पारंपरिक ओपन-हार्ट सर्जरी (जिसमें छाती की हड्डी काटी जाती है) के बजाय मात्र 4 सेंटीमीटर के छोटे कॉस्मेटिक चीरे से ऑपरेशन किया। यही इस सर्जरी को खास बनाता है और इसे दुनिया में अपनी तरह की पहली उपलब्धि माना जा रहा है।
सर्जरी के दौरान मरीज को ‘कार्डियोपल्मोनरी बाईपास मशीन’ पर रखा गया, जिससे शरीर में रक्त संचार बना रहा। डॉक्टरों ने मरीज की अपनी ‘पेरिकार्डियम’ झिल्ली से पैच तैयार कर हृदय के दोष को ठीक किया और अत्यंत बारीक टांकों से उसे सुरक्षित तरीके से लगाया।
बेहद चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन
इस ऑपरेशन में कई तकनीकी चुनौतियां थीं—
अंगों की उलटी संरचना (मिरर इमेज)
हृदय दोष का संवेदनशील हिस्सों के पास होना
छोटे चीरे के जरिए उपकरणों का संचालन
वाल्व और कंडक्शन सिस्टम को सुरक्षित रखना
इन सभी के बावजूद टीम ने उच्च कौशल और सटीकता के साथ सर्जरी पूरी की।
टीमवर्क की मिसाल
एनेस्थीसिया और मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी डॉ. जसविंदर कौर कोहली और उनकी टीम ने संभाली, जबकि परफ्यूशनिस्ट जगदीश चंद्र की टीम ने बाईपास के दौरान रक्त संचार को नियंत्रित रखा।
मरीज पूरी तरह स्वस्थ
सर्जरी 30 मार्च 2026 को की गई। ऑपरेशन के बाद मरीज की रिकवरी तेज और सहज रही तथा कुछ ही दिनों में उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इकोकार्डियोग्राफी में भी सर्जरी पूरी तरह सफल पाई गई।
आयुष्मान भारत योजना का लाभ
यह जटिल सर्जरी आयुष्मान भारत योजना के तहत की गई, जिससे मरीज को आर्थिक राहत मिली और यह जीवनरक्षक उपचार संभव हो सका।
पहले भी बना चुका है इतिहास
एबीवीआईएमएस और आरएमएल का कार्डियक सर्जरी विभाग पहले भी अपनी उपलब्धियों के लिए जाना जाता रहा है। यहां नवजात, बच्चों और वयस्कों के जटिल हृदय रोगों का सफल इलाज किया जाता है।
इस उपलब्धि ने न सिर्फ भारत की चिकित्सा क्षमता को वैश्विक स्तर पर मजबूत किया है, बल्कि यह भी साबित किया है कि सरकारी अस्पतालों में भी अत्याधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता के साथ विश्वस्तरीय इलाज संभव है।
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