मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना गया जिले (Bihar) के माओवादी प्रभावित गुरपा थाना क्षेत्र के एक गांव की है। पीड़िता की मां ने बताया कि 2021 में उनकी बेटी के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ था, जिसका मामला फतेहपुर थाना में दर्ज है। हाल ही में, 30 मई को उन्होंने अदालत में बयान दिया था, जिसके बाद एक आरोपी की गिरफ्तारी हुई, जबकि बाकी फरार हैं। इसी से नाराज होकर आरोपियों के परिजनों ने हमला किया।
डॉक्टर को बनाया निशाना, 10 नामजद, 3 गिरफ्तार
घटना के वक्त डॉक्टर जितेंद्र यादव पीड़िता की मां को मेडिकल सहायता देने पहुंचे थे। तभी पांच महिलाओं और तीन पुरुषों ने घर में घुसकर परिवार को पीटा और डॉक्टर को भी पीट-पीट कर अधमरा कर दिया। डॉक्टर को पेड़ से बांधकर लाठी, डंडों और लोहे की रॉड से पीटा गया।
पुलिस को सूचित करने का साहस पीड़िता की नाबालिग भांजी ने दिखाया, जिसने दौड़कर 112 डायल इमरजेंसी वाहन को रोका और पुलिस को बुलाया। पुलिस ने समय पर पहुंचकर डॉक्टर को छुड़ाया और पहले फतेहपुर सीएचसी, फिर मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया।
पुलिस के अनुसार, डॉक्टर की हालत अब स्थिर है। गुरपा थाने में डॉक्टर की शिकायत पर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर लिया गया है और 10 लोगों को नामजद किया गया है, जिनमें से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। बाकी की तलाश जारी है।
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तेजस्वी यादव ने वीडियो साझा कर नीतीश सरकार पर साधा निशाना
बिहार विधानसभा (Bihar) में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा, "बिहार की स्थिति अब तालिबान से भी बदतर हो गई है। जहां एक डॉक्टर को सिर्फ इसलिए पेड़ से बांधकर पीटा गया क्योंकि वह गैंगरेप पीड़िता की मां का इलाज कर रहा था।"
तेजस्वी ने आगे कहा कि राज्य (Bihar) की कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। मुख्यमंत्री बेहोश हैं, सरकार मदहोश है। अधिकारी और मंत्री खजाना लूटने में लगे हैं, प्रशासन अराजकता में है।
पुलिस का दावा- घटना का बलात्कार केस से नहीं है संबंध
वहीं, वजीरगंज के एसडीपीओ सुनील कुमार पांडेय ने कहा कि घटना का गैंगरेप केस से कोई संबंध नहीं है, बल्कि यह पुरानी ज़मीन विवाद से जुड़ी है। उन्होंने पुष्टि की कि डॉक्टर सुरक्षित हैं और उनका इलाज चल रहा है।
हालांकि पीड़िता की मां और परिवार के बयान, वायरल वीडियो और विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाएं पुलिस के दावे पर सवाल खड़े कर रही हैं।
यह घटना न केवल बिहार (Bihar) की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह दर्शाती है कि कैसे डॉक्टरों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा भी खतरे में है। सरकार और प्रशासन से मांग है कि आरोपियों को जल्द से जल्द सजा दिलाई जाए और पीड़ित परिवार को सुरक्षा दी जाए।
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