स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, हर साल डायरिया के कारण 5 साल से कम उम्र के बच्चों की कुल मृत्यु का 6-7% हिस्सा होता है।
घर-घर पहुंच रही हैं ASHA और ANM कार्यकर्ता
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) हरियाणा के निदेशक डॉ. वीरेंद्र यादव ने बताया कि राज्य के सभी जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे ओआरएस और ज़िंक की गोलियां घर-घर जाकर वितरित करें।
अभियान में ASHA कार्यकर्ता और ANM (सहायक नर्स मिडवाइफ) घर-घर जाकर न केवल किट बांट रही हैं, बल्कि स्वच्छता, हाथ धोने की आदत और सुरक्षित पेयजल के महत्व पर भी जागरूकता फैला रही हैं।
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मां को दी जा रही विशेष सलाह
अधिकारियों के मुताबिक, प्रत्येक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक स्वास्थ्यकर्मी को नियुक्त किया गया है, जो ओआरएस और ज़िंक के उपयोग की जानकारी देता है। डॉक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मां को व्यक्तिगत रूप से ज़िंक 14 दिन तक देने की सलाह दें।
प्रत्येक बच्चे को कम से कम एक ओआरएस पैकेट और 13 ज़िंक टैबलेट दिए जा रहे हैं।
बहु-विभागीय भागीदारी से बढ़ेगी पहुंच
स्वास्थ्य विभाग इस अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग, पंचायत राज, जल जीवन मिशन, ग्रामीण और शहरी विकास विभाग के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि यह संदेश राज्य के कोने-कोने तक पहुंचे।
ओडिशा में भी डायरिया का प्रकोप
उल्लेखनीय है कि हाल ही में ओडिशा के जाजपुर जिले में डायरिया (STOP Diarrhoea Campaign 2025) फैलने से 4 लोगों की मौत हो गई थी और 500 से अधिक लोग प्रभावित हुए थे। इसी को देखते हुए हरियाणा सरकार ने पहले से ही रोकथाम के लिए यह ठोस कदम उठाया है।

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