नई दिल्ली, 14 जुलाई 2026
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी (ASU) चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली में मजबूत पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के International Classification of Health Interventions (ICHI) Framework के तहत पांच दिवसीय संपादकीय कार्यशाला (Editorial Workshop) का शुभारंभ किया है। 13 से 17 जुलाई 2026 तक चलने वाली इस कार्यशाला का उद्देश्य ICHI Framework के Alpha Draft को परिष्कृत करना और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के लिए वैज्ञानिक कंटेंट मॉडल विकसित करना है।
WHO Framework में आयुष को मिलेगी वैश्विक पहचान
इस कार्यशाला का आयोजन केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS) द्वारा अपने WHO Collaborating Centre, National Institute of Indian Medical Heritage (NIIMH), Hyderabad के माध्यम से किया जा रहा है। इसमें आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी चिकित्सा पद्धतियों के लिए National Health Intervention Codes (NHIC) का वैज्ञानिक और मानकीकृत ढांचा तैयार किया जा रहा है। कार्यशाला में देश-विदेश के वैज्ञानिक विशेषज्ञ, संस्थान प्रमुख और स्वास्थ्य सूचना विज्ञान (Health Informatics) से जुड़े विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। इसका उद्देश्य भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम और Universal Health Coverage Framework के अनुरूप विकसित करना है।
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हजारों उपचार प्रक्रियाओं का होगा वैज्ञानिक मानकीकरण
यह कार्यशाला मई 2026 में आयोजित परामर्श बैठकों के दौरान तैयार किए गए प्रारंभिक मसौदे पर आधारित है। विशेषज्ञों द्वारा सत्यापित डेटा के अनुसार, आयुर्वेद में 13 विशेषज्ञता क्षेत्रों की 76 उपचार पद्धतियां और 714 प्रक्रियाएं, सिद्ध में 25 विशेषज्ञता क्षेत्रों की 130 उपचार पद्धतियां और 996 प्रक्रियाएं, जबकि यूनानी में 15 विशेषज्ञता क्षेत्रों की 179 उपचार पद्धतियां और 551 प्रक्रियाओं को इस परियोजना में शामिल किया गया है। इन सभी उपचार प्रक्रियाओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कोडिंग और वर्गीकरण देने का कार्य किया जाएगा, जिससे वैश्विक स्तर पर इनकी स्वीकार्यता बढ़ेगी।
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वैद्य राजेश कोटेचा: यह सिर्फ कोडिंग नहीं
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि यह केवल कोडिंग प्रक्रिया नहीं, बल्कि भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक वैज्ञानिक, डिजिटल और नीतिगत ढांचे में स्थापित करने की परिवर्तनकारी पहल है। उन्होंने कहा कि मानकीकृत स्वास्थ्य शब्दावली अपनाने से आयुष आधारित स्वास्थ्य हस्तक्षेप डिजिटल हेल्थ सिस्टम का अभिन्न हिस्सा बनेंगे। वहीं, मंत्रालय की संयुक्त सचिव डॉ. कविता जैन ने डिजिटल प्रलेखन और वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को शामिल करने के दीर्घकालिक महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में CCRAS, CCRUM, CCRS, WHO और Global Traditional Medicine Centre (Jamnagar) के विशेषज्ञों ने भी वैश्विक अंतर-संचालनीयता और डिजिटल स्वास्थ्य मानकों पर अपने विचार साझा किए।
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आर. पी. अरोड़ा
सीनियर जर्नलिस्ट
तीन दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय आर. पी. अरोड़ा राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और समसामयिक विषयों के अनुभवी विश्लेषक हैं। खोजी रिपोर्टिंग और जमीनी मुद्दों पर उनकी पैनी नजर उन्हें एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।
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