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Saharanpur में बच्चों पर बढ़ा Viral Fever का खतरा, बारिश के बाद शरीर पर दिख रहे रैशेज

Saharanpur में लगातार बदलते मौसम और बारिश के बीच बच्चों में Viral Fever के मामले बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार तेज बुखार के साथ शरीर पर रैशेज भी दिखाई दे रहे हैं। जानें विशेषज्ञों की सलाह और बचाव के उपाय।

Saharanpur

सहारनपुर, 22 जुलाई 2026

Saharanpur में लगातार हो रही बारिश और मौसम में बदलाव का असर बच्चों की सेहत पर दिखाई देने लगा है। जिले के अस्पतालों और निजी क्लीनिकों में Viral Fever से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ रही है। कई बच्चों में तेज बुखार के साथ शरीर पर लाल रैशेज (Rashes), गले में दर्द, खांसी और कमजोरी जैसे लक्षण भी सामने आ रहे हैं। चिकित्सकों ने अभिभावकों से बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर विशेष सतर्कता बरतने और लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की अपील की है।

बारिश और बदलते मौसम से बढ़े Viral Fever के मामले

बारिश के बाद बढ़ी नमी और मौसम में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव के कारण वायरल संक्रमण तेजी से फैल रहा है। अस्पतालों में रोजाना बड़ी संख्या में ऐसे बच्चे पहुंच रहे हैं जिन्हें तेज बुखार के साथ शरीर पर रैशेज की शिकायत है। चिकित्सकों का कहना है कि इस मौसम में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर होने के कारण संक्रमण तेजी से फैल सकता है। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों के खान-पान, साफ-सफाई और पर्याप्त आराम का विशेष ध्यान रखना चाहिए ताकि संक्रमण का खतरा कम किया जा सके।

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बाल रोग विशेषज्ञ ने दी समय पर जांच कराने की सलाह

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुशील कुमार के अनुसार, इन दिनों बच्चों में Viral Fever के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। कई मरीज तेज बुखार के साथ शरीर पर रैशेज की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि बच्चे को लगातार बुखार, शरीर पर दाने, कमजोरी, सुस्ती या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें तो बिना डॉक्टर की सलाह के दवा देने से बचना चाहिए। समय पर जांच और सही उपचार से अधिकांश वायरल संक्रमण को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने अभिभावकों से स्वयं दवा देने के बजाय चिकित्सकीय परामर्श लेने की अपील की।

स्वच्छता और बचाव पर दें विशेष ध्यान

डॉ. सुशील कुमार ने सलाह दी कि बारिश के मौसम में बच्चों को गंदे पानी और भीगने से बचाया जाए। उन्हें केवल स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल दिया जाए तथा पौष्टिक भोजन कराया जाए ताकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहे। यदि बुखार दो-तीन दिन से अधिक रहे, रैशेज तेजी से बढ़ें या बच्चे को सांस लेने में तकलीफ, लगातार उल्टी या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो तो तुरंत अस्पताल में जांच करानी चाहिए। चिकित्सकों का मानना है कि समय पर इलाज से जटिलताओं से बचा जा सकता है।

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दीपक अरोड़ा

पत्रकार (BAJMC ,LLB ) सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।