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Pig Brain Preservation: क्या मौत के बाद इंसान को दोबारा जिंदा किया जा सकेगा?

Pig Brain Preservation में वैज्ञानिकों ने बड़ी सफलता हासिल की है। एक पूरे सूअर (Pig) के मस्तिष्क को विशेष तकनीक से संरक्षित किया गया है, जिससे भविष्य में Reanimation और Brain Preservation पर नई बहस शुरू हो गई है।

Pig Brain Preservation

लंदन/पोर्टलैंड, 2 जून 2026

 मृत्यु के बाद इंसान को दोबारा जीवित करने की संभावना क्या कभी हकीकत बन सकती है? इस सवाल ने एक बार फिर वैज्ञानिक जगत में चर्चा छेड़ दी है। वैज्ञानिकों ने पहली बार एक पूरे Pig Brain (सूअर के मस्तिष्क) को बेहद कम क्षति के साथ संरक्षित करने का दावा किया है। यह उपलब्धि भविष्य में Brain Preservation और Reanimation से जुड़े शोधों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

Brain Preservation में बड़ी सफलता

रिपोर्ट्स के अनुसार, शोधकर्ताओं ने सूअर के मस्तिष्क को मृत्यु के कुछ ही मिनटों के भीतर विशेष रासायनिक प्रक्रिया से संरक्षित किया। इस तकनीक में पहले रक्त को हटाया गया और फिर ऐसे रसायनों का उपयोग किया गया, जो मस्तिष्क की कोशिकाओं और न्यूरल संरचना को स्थिर बनाए रखते हैं। बाद में ऊतक को अत्यंत कम तापमान पर संरक्षित किया गया।

क्यों अहम माना जा रहा है यह शोध?

वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि मस्तिष्क की संरचना और उसमें मौजूद न्यूरल जानकारी सुरक्षित रखी जा सके, तो भविष्य में उन्नत तकनीकों की मदद से उसे पढ़ने या पुनर्निर्मित करने की संभावना पर अध्ययन किया जा सकता है। हालांकि वर्तमान में ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है कि संरक्षित मस्तिष्क को दोबारा सक्रिय कर व्यक्ति को जीवित किया जा सके।

Reanimation पर क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

शोध से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तकनीक फिलहाल केवल मस्तिष्क की संरचना को सुरक्षित रखने पर केंद्रित है। इसे "मृत्यु के बाद पुनर्जीवन" की तकनीक के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी व्यक्ति की चेतना, स्मृतियों और व्यक्तित्व को दोबारा बहाल करना अभी विज्ञान की पहुंच से काफी दूर है।

पहले भी हुए हैं ऐसे प्रयोग

इससे पहले 2019 में शोधकर्ताओं ने मृत सूअरों के मस्तिष्क में कुछ कोशिकीय और चयापचय (Metabolic) गतिविधियों को आंशिक रूप से बहाल करने में सफलता हासिल की थी। वहीं 2024 में भी वैज्ञानिकों ने मृत्यु के कुछ समय बाद Pig Brain में सीमित गतिविधियां पुनः शुरू करने से जुड़े प्रयोग किए थे। हालांकि इन अध्ययनों में चेतना या पूर्ण मस्तिष्क कार्यक्षमता की वापसी नहीं देखी गई थी।

नैतिक और वैज्ञानिक बहस तेज

इस नई उपलब्धि ने जीवन, मृत्यु और चेतना की परिभाषा को लेकर नैतिक तथा वैज्ञानिक बहस को भी तेज कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसी तकनीकों के विकास के साथ कई कानूनी और नैतिक सवाल भी सामने आ सकते हैं।

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