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Saharanpur में नवजात की मौत पर हंगामा, परिजनों ने इलाज में देरी का लगाया आरोप...

खबर का सार

Saharanpur के जिला महिला अस्पताल में प्रसव के दौरान नवजात शिशु की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा किया। परिजनों ने इलाज में देरी और लापरवाही का आरोप लगाया, जबकि अस्पताल प्रशासन ने आरोपों से इनकार करते हुए जांच के लिए टीम गठित की है।

Saharanpur
सहारनपुर, 15 जून 2026 Saharanpur के जिला महिला अस्पताल में प्रसव के दौरान एक नवजात शिशु की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। परिजनों का आरोप है कि महिला को समय पर उचित उपचार नहीं मिला और जांच व इलाज में देरी के कारण नवजात की जान चली गई। मामले की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। वहीं अस्पताल प्रशासन ने लापरवाही के आरोपों से इनकार करते हुए मामले की जांच के लिए चिकित्सकों की टीम गठित करने की बात कही है।

प्रसव पीड़ा के बाद अस्पतालों के चक्कर लगाने का आरोप

परिजनों के अनुसार गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने पर पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया था। उनका आरोप है कि वहां से महिला को वापस भेज दिया गया और बाद में हालत बिगड़ने पर दोबारा अस्पताल पहुंचने पर अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी गई। परिजनों का कहना है कि जांच और रेफरल की प्रक्रिया में समय लगा, जिससे मरीज की स्थिति और गंभीर हो गई। बाद में महिला को जिला महिला अस्पताल लाया गया, जहां प्रसव के दौरान नवजात शिशु की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

अस्पताल परिसर में हंगामा, कार्रवाई की मांग

नवजात की मौत की सूचना मिलते ही परिजन और स्थानीय लोग अस्पताल परिसर में एकत्र हो गए। परिजनों ने आरोप लगाया कि उन्हें समय पर चिकित्सकीय सहायता नहीं मिली और उपचार प्रक्रिया में देरी की गई। घटना को लेकर अस्पताल में काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही। कुछ सामाजिक संगठनों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने भी अस्पताल प्रशासन से जवाब मांगा। स्थिति को देखते हुए पुलिस को मौके पर बुलाना पड़ा। पुलिस अधिकारियों ने परिजनों को समझाकर शांत कराया और मामले की जांच का आश्वासन दिया।

अस्पताल प्रशासन ने आरोपों से किया इनकार

जिला महिला अस्पताल प्रशासन का कहना है कि महिला के उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई। अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार नवजात की मृत्यु प्रसव से पहले ही हो चुकी थी और चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार दिया गया। प्रशासन ने यह भी कहा कि यदि किसी कर्मचारी द्वारा धन मांगने या अन्य अनियमितता की शिकायत सामने आती है तो उसकी जांच कराई जाएगी। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए चिकित्सकों की एक टीम गठित की गई है, जो सभी पहलुओं की समीक्षा करेगी।

मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं पर फिर उठे सवाल

यह घटना एक बार फिर मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, रेफरल सिस्टम और समय पर उपचार की चुनौतियों को सामने लाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भावस्था और प्रसव से जुड़े मामलों में समय पर जांच, उचित निगरानी और त्वरित चिकित्सकीय हस्तक्षेप बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। फिलहाल इस मामले में अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या थे और क्या किसी स्तर पर चूक हुई थी।

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