नई दिल्ली, 26 मई 2026
PM Modi ने मंगलवार को एक ऐसा संस्कृत सुभाषितम् साझा किया, जिसने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इस श्लोक के जरिए उन्होंने ज्ञान, आत्मा और मानवता के कल्याण को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया।
आखिर क्या लिखा PM Modi ने?
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि सच्चा ज्ञान देश, समाज और पूरी मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने कहा कि हमारा ज्ञान और हमारे कर्म पूरी मानवता के लिए प्रेरणा बनने चाहिए।
इसके साथ उन्होंने संस्कृत में यह श्लोक साझा किया:
“आत्मा शुद्धः सदा नित्यः सुखरूपः स्वयम्प्रभः।
अज्ञानान्मलिनो भाति ज्ञानाच्छुद्धो भवत्ययम्।।”
श्लोक का क्या है मतलब?
इस सुभाषितम् का अर्थ बताते हुए कहा गया कि आत्मा स्वभाव से हमेशा शुद्ध, नित्य, सुख स्वरूप और स्वयं प्रकाशमान होती है। लेकिन अज्ञान के कारण वह मलिन दिखाई देती है। ज्ञान प्राप्त होने पर वही आत्मा अपने शुद्ध स्वरूप में फिर से प्रकट हो जाती है।
क्यों चर्चा में है यह पोस्ट?
प्रधानमंत्री के इस संदेश को आध्यात्मिकता और सकारात्मक सोच से जोड़कर देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर कई लोग इस श्लोक के अर्थ और उसके गहरे संदेश पर चर्चा कर रहे हैं।

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