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Delhi HC ने DNB Counselling पर NBE को लगाई फटकार, खाली Reserved Seats को लेकर दिया बड़ा फैसला

खबर का सार

Delhi High Court ने कहा कि यदि योग्य Reserved Category उम्मीदवार उपलब्ध नहीं हैं तो NBE को Counselling से पहले खाली Reserved DNB Seats को De-reserve करने पर विचार करना चाहिए। जानिए कोर्ट ने क्या कहा।

Delhi HC

नई दिल्ली, 31 जुलाई 2026

Delhi HC ने National Board of Examinations in Medical Sciences (NBEMS) से कहा है कि यदि किसी Reserved Category में योग्य उम्मीदवार उपलब्ध नहीं है, तो DNB Counselling से पहले खाली सीटों को De-reserve करने पर विचार किया जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि मेडिकल सीटों का खाली रह जाना सार्वजनिक हित में नहीं है और उपलब्ध सीटों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आरक्षण व्यवस्था को पूरा अवसर मिलना चाहिए, लेकिन जब किसी श्रेणी में पात्र उम्मीदवार ही उपलब्ध न हों, तब सीटों को खाली छोड़ना उचित नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने क्यों जताई चिंता?

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यदि पात्र Reserved Category उम्मीदवार उपलब्ध नहीं हैं, तो संबंधित सीटों को खाली रखने से न तो आरक्षित वर्ग को कोई लाभ मिलेगा और न ही स्वास्थ्य व्यवस्था को। कोर्ट ने माना कि देश में मेडिकल विशेषज्ञों की आवश्यकता लगातार बनी हुई है और ऐसे में प्रशिक्षण की सीटें खाली रहना संसाधनों की बर्बादी है। अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि प्रवेश प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए, ताकि उपलब्ध सीटों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

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NBE Counselling प्रक्रिया पर असर

यह मामला DNB Counselling प्रक्रिया के दौरान खाली रह गई आरक्षित सीटों से जुड़ा था। अदालत ने संकेत दिया कि भविष्य में NBEMS ऐसी परिस्थितियों के लिए स्पष्ट नीति बनाने पर विचार कर सकता है, जिससे योग्य उम्मीदवारों के रहते सीटें खाली न रहें। हालांकि, कोर्ट ने कोई नई आरक्षण नीति लागू नहीं की है, बल्कि मामले के तथ्यों के आधार पर यह टिप्पणी की कि मेडिकल सीटों की बर्बादी से बचना आवश्यक है।

क्या है मामले का महत्व?

इस फैसले को DNB और अन्य मेडिकल प्रवेश प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि भविष्य में इस दिशा में नीति बनाई जाती है, तो पात्र उम्मीदवारों की अनुपस्थिति में खाली रह जाने वाली कुछ आरक्षित सीटों का बेहतर उपयोग संभव हो सकता है। फिलहाल, यह निर्णय संबंधित मामले की परिस्थितियों पर आधारित है और व्यापक नीति परिवर्तन का आदेश नहीं माना जाएगा। मेडिकल शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे Counselling प्रक्रिया में पारदर्शिता और सीटों के बेहतर उपयोग पर चर्चा तेज हो सकती है।

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दीपक अरोड़ा

पत्रकार (BAJMC ,LLB ) सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।