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Vivek Dahiya ने Babies के लिए अपनाया Ajwain Potli का तरीका, क्या सच में है सुरक्षित?

खबर का सार

Vivek Dahiya के Ajwain Potli वाले पोस्ट के बाद यह घरेलू नुस्खा चर्चा में है। जानिए क्या Ajwain Potli नवजात शिशुओं के लिए सुरक्षित है और डॉक्टर इसे लेकर क्या सलाह देते हैं।

Vivek Dahiya

टीवी अभिनेता Vivek Dahiya द्वारा अपने नवजात बच्चों के लिए Ajwain Potli का इस्तेमाल करने का जिक्र सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। इसके बाद कई माता-पिता यह जानना चाहते हैं कि क्या यह पारंपरिक घरेलू उपाय वास्तव में सुरक्षित और प्रभावी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि Ajwain Potli से कुछ मामलों में बंद नाक (Nasal Congestion) से अस्थायी राहत मिल सकती है, लेकिन इसे उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। खासकर नवजात शिशुओं पर किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले Pediatrician की सलाह लेना जरूरी है।

Ajwain Potli को लेकर क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

विशेषज्ञों के अनुसार Ajwain में मौजूद कुछ प्राकृतिक तत्व भाप या हल्की सुगंध के जरिए बंद नाक से राहत देने में सहायक हो सकते हैं। हालांकि Potli को कभी भी सीधे बच्चे की त्वचा पर नहीं रखना चाहिए और न ही अत्यधिक गर्म अवस्था में इसका इस्तेमाल करना चाहिए। डॉक्टरों का कहना है कि यदि बच्चे को सांस लेने में परेशानी, तेज बुखार, दूध पीने में दिक्कत या लगातार Congestion की समस्या हो तो घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

नवजात शिशुओं के लिए क्या बरतें सावधानी?

बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि नवजात शिशुओं की त्वचा और श्वसन तंत्र बेहद संवेदनशील होता है। ऐसे में Camphor, Eucalyptus Oil या तेज सुगंध वाले पदार्थों का सीधे इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। यदि Ajwain Potli का उपयोग किया भी जाए तो उसे सुरक्षित दूरी पर रखा जाए और बच्चे की प्रतिक्रिया पर नजर रखी जाए। किसी भी तरह की सांस लेने में तकलीफ या लक्षण बढ़ने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

घरेलू नुस्खा इलाज का विकल्प नहीं

विशेषज्ञों का मानना है कि Ajwain Potli केवल हल्के Congestion में सहायक उपाय हो सकती है, लेकिन इसे दवा या चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं समझना चाहिए। Babies में Viral Infection या लगातार बंद नाक की स्थिति में Pediatrician द्वारा सुझाए गए उपचार, जैसे Saline Nasal Drops और आवश्यक मेडिकल जांच, अधिक सुरक्षित और वैज्ञानिक विकल्प हैं। यदि लक्षण लंबे समय तक बने रहें या गंभीर हों तो तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।

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दीपक अरोड़ा

पत्रकार (BAJMC ,LLB ) सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।