पटना, बिहार, 29 जुलाई 2026
AIIMS Patna ने बिहार के Healthcare Professionals के लिए 3-Day Mass Casualty Management Course की शुरुआत की है। इस Training Programme का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं, प्राकृतिक आपदाओं, औद्योगिक हादसों और अन्य बड़े आपातकालीन घटनाओं के दौरान बड़ी संख्या में घायल मरीजों के प्रभावी उपचार और प्रबंधन की क्षमता विकसित करना है। कार्यक्रम में विभिन्न सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों से जुड़े डॉक्टर, नर्सिंग अधिकारी और अन्य स्वास्थ्यकर्मी भाग ले रहे हैं। संस्थान का मानना है कि ऐसी विशेष Training Emergency Medical Response को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
Emergency Response पर रहेगा फोकस
Training के दौरान प्रतिभागियों को Mass Casualty Management, Triage, Emergency Coordination, Patient Stabilization, Disaster Preparedness और Hospital Response System जैसे महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी जाएगी। विशेषज्ञों द्वारा Theory के साथ Practical Sessions भी आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि स्वास्थ्यकर्मी वास्तविक आपदा जैसी परिस्थितियों में त्वरित और संगठित तरीके से कार्य कर सकें। इस पहल का उद्देश्य अस्पतालों की आपातकालीन तैयारियों को मजबूत करना और गंभीर परिस्थितियों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना है।
Bihar के Healthcare System को मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की Training से बिहार के Healthcare System की Disaster Response क्षमता मजबूत होगी। बड़े हादसों के दौरान मरीजों की प्राथमिकता तय करना, सीमित संसाधनों का प्रभावी उपयोग करना और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना इस Course का प्रमुख उद्देश्य है। इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की निर्णय लेने की क्षमता में भी सुधार होगा और आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।
Disaster Preparedness पर बढ़ता जोर
हाल के वर्षों में आपदा प्रबंधन और Emergency Healthcare को मजबूत करने के लिए AIIMS Patna लगातार विभिन्न Training Programmes आयोजित कर रहा है। संस्थान पहले भी Disaster Response और Patient Safety से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित कर चुका है। अधिकारियों का मानना है कि नियमित प्रशिक्षण से स्वास्थ्य संस्थानों की तैयारी बेहतर होगी और भविष्य में किसी भी बड़े हादसे या आपदा के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक व्यवस्थित ढंग से संचालित किया जा सकेगा।
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