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विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं में समान पहुंच पर WHO बैठक, भारत ने रखा अपना पक्ष

तिमोर-लेस्ते में WHO की क्षेत्रीय बैठक में विशेषज्ञ देखभाल और स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता पर चर्चा हुई। भारत ने ग्रामीण और वंचित आबादी की पहुंच पर जोर दिया।

विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच: मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों का एआई-निर्मित सांकेतिक चित्रण; वास्तविक WHO बैठक की तस्वीर नहीं।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना जरूरी है, लेकिन वे कहां काम करते हैं और मरीज उन तक कैसे पहुंचते हैं, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण प्रश्न है। तिमोर-लेस्ते में WHO की दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय समिति के 79वें सत्र में भारत ने ग्रामीण, आदिवासी और सुविधाओं से वंचित समुदायों के लिए विशेषज्ञ सेवाओं तक पहुंच पर अपना पक्ष रखा। स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसका विवरण 8 सितंबर 2026 को जारी किया। भारत ने क्या बताया? PIB के अनुसार, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने चिकित्सा शिक्षा के विस्तार, विशेषज्ञों के प्रशिक्षण और कठिन क्षेत्रों में उन्हें बनाए रखने के उपायों पर जोर दिया। मंत्रालय ने बताया कि 2014 के बाद मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 858 हुई है। यह सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ा है, इस रिपोर्ट का स्वतंत्र संस्थान-वार सर्वेक्षण नहीं। दिली घोषणा में किस बात पर सहमति? क्षेत्र के देशों ने विशेषज्ञ स्वास्थ्यकर्मियों की कमी और उनके असमान वितरण से निपटने के लिए दिली घोषणा अपनाई। इसमें प्रशिक्षण, नियुक्ति, विशेषज्ञों को वंचित क्षेत्रों में बनाए रखना और रेफरल व्यवस्था मजबूत करना शामिल है। टेलीपरामर्श तथा प्राथमिक स्वास्थ्य टीमों और विशेषज्ञ अस्पतालों के बीच तालमेल पर भी बल दिया गया। सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज का अर्थ WHO के अनुसार, सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज का मतलब केवल अस्पताल का मौजूद होना नहीं है। लोगों को जरूरत के समय और स्थान पर गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिलनी चाहिए, और उपचार का खर्च उन्हें आर्थिक संकट में न धकेले। इसमें बीमारी की रोकथाम से लेकर उपचार, पुनर्वास और दर्द व अन्य तकलीफ कम करने वाली देखभाल तक शामिल है। इसीलिए किसी व्यवस्था का आकलन केवल डॉक्टरों या इमारतों की संख्या से पूरा नहीं होता। उपलब्ध सेवा का उपयोग कौन कर पा रहा है और किसे खर्च अथवा पहुंच की बाधा हो रही है, ये भी जरूरी प्रश्न हैं। WHO की यह परिभाषा सामान्य स्वास्थ्य-नीति संदर्भ है; इसे भारत में सभी सेवाएं मुफ्त हो जाने की घोषणा न समझें। मरीज को क्या जानकारी चाहिए? इस नीति का व्यावहारिक असर समझने के लिए स्थानीय स्तर पर पूछना होगा: संबंधित विशेषज्ञ किस दिन उपलब्ध हैं? रेफरल कहां से मिलेगा? जांच और अगली मुलाकात की व्यवस्था क्या है? शुल्क या सहायता की पात्रता कौन बताएगा? ये उपयोगी प्रश्न हैं, किसी अस्पताल के लिए इस रिपोर्ट में घोषित प्रक्रिया नहीं। अभी क्या दावा नहीं किया जा सकता? क्षेत्रीय घोषणा से हर जिले में विशेषज्ञ नियुक्त हो जाने या प्रतीक्षा अवधि घट जाने की पुष्टि नहीं होती। उसके लिए वास्तविक तैनाती, उपलब्ध सेवाओं और मरीजों के अनुभव का अलग आकलन चाहिए। फिलहाल खबर देशों की प्रतिबद्धताओं और भारत द्वारा प्रस्तुत नीति-दिशा की है, किसी नए व्यक्तिगत उपचार की नहीं। स्रोत: PIB, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, 8 सितंबर 2026: https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2307968 WHO, Universal health coverage: https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/universal-health-coverage-(uhc) चित्र: विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं का एआई-निर्मित सांकेतिक चित्रण; वास्तविक WHO बैठक की तस्वीर नहीं।