राष्ट्रीय ख़बरें

SUMAN Roadmap 2030: 13 राज्यों के 130 जिलों में मातृ-नवजात देखभाल पर विशेष फोकस

SUMAN Roadmap 2030 के तहत 13 उच्च-प्राथमिकता वाले राज्यों के 130 जिलों में मातृ और नवजात स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता मजबूत करने की योजना बनाई गई है।

मातृ और नवजात देखभाल की निरंतरता को दर्शाता मेडिकल रिपोर्टर का संपादकीय चित्रण
मातृ और नवजात देखभाल की निरंतरता को दर्शाता मेडिकल रिपोर्टर का संपादकीय चित्रण

मातृ और नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को गर्भधारण से पहले की सलाह से लेकर प्रसवोत्तर देखभाल तक जोड़ने के लिए केंद्र सरकार ने SUMAN Roadmap 2030 पर राज्यों के साथ विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। लखनऊ में 2 और 3 सितंबर 2026 को आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में 13 उच्च-प्राथमिकता वाले राज्यों के 130 जिलों पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई।

रोडमैप का उद्देश्य

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार अभियान का लक्ष्य 2030 तक रोकी जा सकने वाली मातृ और नवजात मृत्यु को शून्य की दिशा में तेजी से कम करना है। इसके लिए अलग-अलग सेवाओं को एक निरंतर देखभाल व्यवस्था में जोड़ने पर जोर दिया गया है, ताकि जोखिम की पहचान, उपचार और रेफरल के बीच मरीज न छूटे।

13 राज्य और 130 जिले

कार्यशाला में 13 उच्च-प्राथमिकता वाले राज्यों और 130 जिलों के लिए स्थानीय जरूरतों पर आधारित योजनाएं बनाने पर चर्चा हुई। मंत्रालय ने राज्यों से कहा कि वे उपलब्ध स्वास्थ्य आंकड़ों, जिलावार कमियों और सेवा की गुणवत्ता के आधार पर स्पष्ट लक्ष्य तय करें। बैठक में केंद्र और राज्यों के अधिकारियों, विकास भागीदारों तथा चिकित्सा विशेषज्ञों सहित 200 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए।

गर्भावस्था से प्रसवोत्तर देखभाल तक

रोडमैप में गर्भधारण-पूर्व परामर्श, प्रसवपूर्व जांच, सुरक्षित प्रसव, प्रसव के बाद मां की निगरानी और नवजात शिशु की देखभाल को एक ही क्रम का हिस्सा माना गया है। उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की समय पर पहचान और महिला को उचित संस्थान तक पहुंचाने की व्यवस्था को महत्वपूर्ण बताया गया।

किन मुद्दों पर जोर

चर्चा में प्रसवोत्तर रक्तस्राव की रोकथाम और उपचार, रेफरल परिवहन, जरूरत के अनुसार सीजेरियन सेवाओं की उपलब्धता, डिजिटल स्वास्थ्य प्रणालियां, दूरदराज क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं के लिए जन्म-प्रतीक्षा गृह और जलवायु परिवर्तन से बढ़ने वाले स्वास्थ्य जोखिम शामिल रहे। राज्यों से इन विषयों पर व्यावहारिक और मापने योग्य कदम तय करने को कहा गया।

राज्यों से सामने आए उदाहरण

विभिन्न राज्यों ने अपने कार्यक्रम साझा किए। इनमें ओडिशा का प्रसवोत्तर रक्तस्राव प्रबंधन, मध्य प्रदेश की SUMAN पंचायत और चैटबॉट पहल, उत्तराखंड का मातृ स्वास्थ्य वॉर रूम, महाराष्ट्र का वात्सल्य कार्यक्रम, कर्नाटक का रोकी जा सकने वाली मातृ मृत्यु को समाप्त करने का मिशन और उत्तर प्रदेश की डिजिटल स्वास्थ्य पहल शामिल थीं। इन उदाहरणों का उद्देश्य सफल स्थानीय तरीकों को अन्य जिलों के संदर्भ में समझना था।

पाठकों के लिए इसका अर्थ

यह अभी किसी नई व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह की घोषणा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की नीति और क्रियान्वयन योजना है। इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि जिलों में प्रशिक्षित कर्मचारी, आपात रेफरल, दवाएं, रक्त और विशेषज्ञ सेवाएं कितनी निरंतर उपलब्ध कराई जाती हैं तथा प्रगति के आंकड़े कितनी पारदर्शिता से मापे जाते हैं। गर्भावस्था या प्रसव से जुड़ी किसी आपात स्थिति में पाठकों को तुरंत निकटतम योग्य स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करना चाहिए।

स्रोत: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की 3 सितंबर 2026 की प्रेस सूचना ब्यूरो विज्ञप्ति, “SUMAN Roadmap 2030 – Accelerating the Continuum of Care”.

चित्र: मेडिकल रिपोर्टर का मूल संपादकीय चित्रण।