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आयुष सेवाओं का 36.92 अरब डॉलर का अनुमान: मरीज और रोजगार के लिए क्या मायने हैं?

खबर का सार

RIS के 15,914 प्रतिष्ठानों के सर्वेक्षण पर आधारित अध्ययन में क्लीनिक, रोजगार और महिलाओं की भागीदारी की तस्वीर सामने आई है। समझें आर्थिक वृद्धि के आँकड़े क्या कहते हैं और इलाज की गुणवत्ता का प्रमाण उनसे अलग क्यों है।

PIB में प्रकाशित आयुष सेवा क्षेत्र अध्ययन का आधिकारिक कवर

आपके आसपास खुलते आयुष क्लीनिक, योग केंद्र और वेलनेस सेवाएं कितनी बड़ी अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं? आयुष मंत्रालय की 30 सितंबर को जारी जानकारी इस सवाल का एक नया अनुमान देती है। लेकिन मरीज के लिए उतना ही जरूरी दूसरा सवाल है: बढ़ता कारोबार उसकी देखभाल की गुणवत्ता के बारे में क्या बताता है, और क्या नहीं बताता?

विकासशील देशों की अनुसंधान एवं सूचना प्रणाली, यानी RIS, के अध्ययन के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में आयुष सेवा क्षेत्र का अनुमानित आर्थिक योगदान 36.92 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। मंत्रालय ने बताया कि अध्ययन छह आयुष प्रणालियों के 15,914 प्रतिष्ठानों के राष्ट्रीय स्तर के सर्वेक्षण पर आधारित है। रिपोर्ट 23 सितंबर को नागपुर में जारी हुई थी; उसके निष्कर्षों की यह सरकारी विज्ञप्ति 30 सितंबर की है।

सबसे बड़ा हिस्सा पड़ोस के क्लीनिक और डे-केयर का

अध्ययन में क्लीनिक और डे-केयर केंद्र मिलकर क्षेत्र के 71 प्रतिशत से अधिक राजस्व के स्रोत बताए गए हैं। स्वतंत्र क्लीनिकों का अनुमानित राजस्व 16.21 अरब डॉलर और डे-केयर केंद्रों का 10.13 अरब डॉलर है। इसका अर्थ है कि इस सेवा अर्थव्यवस्था को समझने के लिए केवल बड़े अस्पताल या महंगे वेलनेस रिसॉर्ट देखना पर्याप्त नहीं होगा। स्थानीय स्तर पर दी जा रही सेवाओं का बड़ा आर्थिक महत्व है।

आयुर्वेद का हिस्सा लगभग 48 प्रतिशत, यानी 17.73 अरब डॉलर बताया गया है। ये आयुष सेवा क्षेत्र के आँकड़े हैं। इन्हें बिना अलग जानकारी के पूरे औषधि निर्माण उद्योग, दवा निर्यात या भारत के कुल स्वास्थ्य बाजार का आकार नहीं मानना चाहिए। अध्ययन का दायरा समझना किसी बड़े आँकड़े को पढ़ने का पहला कदम है।

16.91 प्रतिशत वृद्धि का सही मतलब

विज्ञप्ति के मुताबिक वित्त वर्ष 2022-23 से क्षेत्र की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर 16.91 प्रतिशत रही। यह अवधि में वृद्धि को सालाना औसत दर के रूप में व्यक्त करने का तरीका है; इसका मतलब हर क्लीनिक की कमाई समान गति से बढ़ना नहीं है।

इसी तरह 2047 तक 216 से 318 अरब डॉलर का अनुमान भविष्य की संभावना है, हासिल हो चुका परिणाम नहीं। मंत्रालय ने इसे बुनियादी ढांचे, गुणवत्ता प्रणालियों, कौशल, डिजिटल क्षमता और अंतरराष्ट्रीय पहुंच को मजबूत करने से जोड़ा है। नीति या निवेश की चर्चा में इस शर्त को बड़े भविष्य-आँकड़े से अलग नहीं किया जा सकता।

रोजगार में महिलाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी

अध्ययन के अनुसार क्षेत्र सीधे 17.6 लाख लोगों की आजीविका का समर्थन करता है और कुल कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी 43 प्रतिशत है। स्थानीय और स्वतंत्र क्लीनिकों में दस लाख से अधिक नौकरियां केंद्रित बताई गई हैं।

ये कुल रोजगार से जुड़े अनुमान हैं, केवल इस वर्ष बनी नई नौकरियों की संख्या नहीं। स्वास्थ्य क्षेत्र में काम तलाश रहे युवाओं के लिए रोजगार का आकार उपयोगी संकेत है, लेकिन किसी पाठ्यक्रम में प्रवेश या नौकरी का फैसला योग्यता, मान्यता, भूमिका और वास्तविक अवसर देखकर ही होना चाहिए।

विदेश से आने वाले मरीज और डिजिटल पहुंच

वित्त वर्ष 2024-25 में चिकित्सा के उद्देश्य से यात्रा से जुड़े आयुष राजस्व का अनुमान 1.77 अरब डॉलर बताया गया है। अध्ययन में कार्यशील वेबसाइट और गुणवत्ता मान्यता वाले संस्थानों के अंतरराष्ट्रीय मरीज आकर्षित करने की अधिक संभावना का संबंध भी सामने आया है।

इस संबंध का अर्थ यह नहीं कि वेबसाइट बना देने से मरीजों की संख्या निश्चित रूप से बढ़ जाएगी। न ही किसी आकर्षक वेबसाइट को चिकित्सा परिणामों का प्रमाण माना जा सकता है। अध्ययन में डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड, कर्मचारी प्रशिक्षण और गुणवत्ता मान्यता को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

मरीज के लिए कारोबार और उपचार का प्रमाण अलग हैं

यह अध्ययन सेवा क्षेत्र के आर्थिक योगदान पर है, किसी विशेष बीमारी के उपचार का क्लिनिकल परीक्षण नहीं। इसलिए राजस्व, लोकप्रियता या भविष्य के बाजार अनुमान से यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि कोई विशेष दवा या प्रक्रिया किसी मरीज के लिए सुरक्षित और प्रभावी है। उस सवाल के लिए संबंधित उपचार के अलग चिकित्सकीय साक्ष्य जरूरी हैं।

सेवा चुनते समय पाठक पूछ सकते हैं: उपचार कौन देगा और उसकी योग्यता क्या है? अपेक्षित लाभ, जोखिम, कुल खर्च और फॉलो-अप क्या होंगे? मेरी पहले से चल रही दवाओं के साथ इस उपचार पर किससे सलाह होगी? ये सवाल किसी पद्धति के विरोध में नहीं, सूचित निर्णय के लिए हैं।

इस रिपोर्ट का महत्व आयुष सेवाओं को आर्थिक नीति और गुणवत्ता सुधार की चर्चा में स्पष्ट जगह देना है। उसकी असली परीक्षा केवल बाजार कितना बढ़ा, इससे नहीं होगी; मरीज को मिलने वाली सेवा कितनी पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह है, यह भी देखना होगा।

चित्र: आयुष सेवा क्षेत्र अध्ययन का आधिकारिक कवर; स्रोत PIB/आयुष मंत्रालय।

स्रोत: आयुष मंत्रालय की 30 सितंबर 2026 की PIB विज्ञप्ति, जिसमें RIS अध्ययन के निष्कर्ष दिए गए हैं। यह लेख विज्ञप्ति पर आधारित है; पूर्ण अध्ययन की पद्धति का स्वतंत्र मूल्यांकन नहीं किया गया है।
https://www.pib.gov.in/PressReleaseDetail.aspx?PRID=2316869&reg=48&lang=1