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मीठा खाने का भी होता है सही समय, गलत समय पर सेवन बढ़ा सकता है ब्लड शुगर और वजन

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लेखक : डॉ. संजीव मिगलानी (एमबीबीएस, एमडी) प्रस्तुति: दीपक अरोड़ा/ मेडिकल रिपोर्टर मिठाई भारतीय खानपान और संस्कृति का अहम हिस्सा है। त्योहार, शादी-ब्याह, जन्मदिन या किसी भी खुशी के मौके पर मीठा खाना आम बात है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मीठा कब खाया जाए, यह भी उतना ही जरूरी है जितना कितना खाया जाए? सही समय पर और सीमित मात्रा में मीठा खाने से शरीर उसे बेहतर ढंग से संभाल पाता है, जबकि गलत समय पर अधिक मात्रा में मिठाई खाने से ब्लड शुगर और वजन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। खाली पेट मीठा खाने से क्यों बचें? डॉ. मिगलानी के अनुसार, सुबह खाली पेट मिठाई, चॉकलेट, बिस्कुट, केक या मीठे पेय पदार्थ लेने से उनमें मौजूद शर्करा तेजी से रक्त में अवशोषित होती है, जिससे ब्लड शुगर अचानक बढ़ सकता है। कुछ समय बाद जब यह स्तर गिरता है तो जल्दी भूख लगना, थकान और दोबारा मीठा खाने की इच्छा जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। यह एक ऐसा चक्र बन जाता है जो धीरे-धीरे सेहत को नुकसान पहुंचाता है। miglani  भोजन के बाद मीठा — एक समझदारी भरा विकल्प मुख्य भोजन के बाद थोड़ी मात्रा में मीठा लेना अधिक उचित माना जाता है। जब पहले दाल, रोटी, सब्जी, सलाद, दही जैसा संतुलित आहार लिया जाता है, तो उसमें मौजूद फाइबर, प्रोटीन और स्वस्थ वसा शर्करा के अवशोषण की गति को धीमा कर देते हैं। इससे ब्लड शुगर में अचानक तेज वृद्धि की संभावना काफी कम हो जाती है। दोपहर में सीमित मात्रा — अपेक्षाकृत बेहतर यदि मीठा खाने की इच्छा हो तो दोपहर के भोजन के बाद सीमित मात्रा में लेना बेहतर विकल्प हो सकता है। दिन के समय अधिकांश लोग शारीरिक रूप से अधिक सक्रिय रहते हैं, जिससे ऊर्जा का उपयोग कुशलता से हो पाता है। रात में अधिक मिठाई से बढ़ सकता है जोखिम डॉ. मिगलानी का कहना है कि रात के समय शरीर की ऊर्जा आवश्यकता अपेक्षाकृत कम होती है। देर रात अधिक मात्रा में मिठाई या मीठे पेय पदार्थ लेने से अतिरिक्त कैलोरी लंबे समय तक शरीर में संचित रह सकती है, जिससे समय के साथ वजन बढ़ने और ब्लड शुगर नियंत्रण प्रभावित होने का जोखिम बढ़ जाता है। मिठाई भोजन का विकल्प नहीं है कई लोग जल्दबाजी में केवल केक, पेस्ट्री या मीठे पेय पदार्थ लेकर मुख्य भोजन छोड़ देते हैं। यह आदत सेहत के लिए उचित नहीं है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए दाल, साबुत अनाज, हरी सब्जियां, फल, दूध या दही और पर्याप्त प्रोटीन युक्त संतुलित आहार आवश्यक है। यदि मीठे की तलब हो तो इन विकल्पों पर विचार करें: - ताजे फल — आम, केला, अंगूर जैसे फलों में प्राकृतिक शर्करा के साथ फाइबर भी होता है - खजूर या अंजीर — थोड़ी मात्रा में लें, पोषक तत्वों से भरपूर हैं - गुड़ — परिष्कृत चीनी की तुलना में बेहतर विकल्प माना जाता है - दही में शहद — प्रोटीन और प्राकृतिक मिठास का संयोजन हालांकि, डायबिटीज के मरीज इन विकल्पों को अपनाने से पहले भी अपने डॉक्टर से परामर्श लें। इन लोगों को रखनी चाहिए विशेष सावधानी डॉ. मिगलानी के अनुसार निम्न लोगों को मीठा खाते समय विशेष ध्यान रखना चाहिए: - डायबिटीज के मरीज - प्री-डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति - मोटापे से जूझ रहे लोग - बार-बार ब्लड शुगर बढ़ने की समस्या वाले मरीज - जिनके परिवार में डायबिटीज का इतिहास हो ऐसे सभी लोगों को चिकित्सक या डायटीशियन की सलाह के अनुसार ही मिठाई का सेवन करना चाहिए।    ? हेल्थ टिप्स बॉक्स — मीठा खाने के 7 आसान नियम ✔ खाली पेट मिठाई खाने से बचें। ✔ भोजन के बाद सीमित मात्रा में मीठा लें। ✔ देर रात अधिक मिठाई खाने की आदत न बनाएं। ✔ मीठे पेय पदार्थों की बजाय ताजे फल बेहतर विकल्प हैं। ✔ नियमित व्यायाम और सक्रिय जीवनशैली अपनाएं। ✔ **परिष्कृत चीनी की जगह गुड़ या शहद को प्राथमिकता दें।** *(नई टिप)* ✔ डायबिटीज या मोटापे की स्थिति में डॉक्टर की सलाह का पालन करें।  क्या कहते हैं डॉ. मिगलानी? "मीठा पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं, लेकिन उसका समय और मात्रा — दोनों महत्वपूर्ण हैं। संतुलित भोजन के बाद सीमित मात्रा में मिठाई लेना, खाली पेट या देर रात अधिक मीठा खाने की तुलना में कहीं बेहतर है। जिन्हें डायबिटीज या मोटापे की समस्या है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।" > — डॉ. संजीव मिगलानी, एमबीबीएस, एमडी ---  लेखक परिचय डॉ. संजीव मिगलानी (एमबीबीएस, एमडी) वरिष्ठ चिकित्सक हैं और पिछले लगभग 20 वर्षों से चिकित्सा सेवा में कार्यरत हैं। उन्हें डायबिटीज, जीवनशैली संबंधी रोगों और निवारक स्वास्थ्य (Preventive Healthcare) के क्षेत्र में विशेष अनुभव है। वे जनजागरूकता के उद्देश्य से वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित सरल स्वास्थ्य लेख लिखते हैं।