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दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: FSSAI को मवेशियों के चारे को रेगुलेट करने का अधिकार नहीं

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नई दिल्ली, 7 अप्रैल। दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) को मवेशियों या पशुओं के चारे को रेगुलेट करने का अधिकार नहीं है। अदालत ने कहा कि यह शक्तियां खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के दायरे से बाहर हैं। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने गोदरेज एग्रोवेट लिमिटेड की याचिका को मंजूरी देते हुए विवादित नियम को रद्द कर दिया। ⚖️ क्या था मामला? कोर्ट ने उस प्रावधान को निरस्त कर दिया जिसमें: दूध और मांस देने वाले पशुओं को मांस व हड्डी का चूरा खिलाने पर रोक थी कमर्शियल पशु चारे के लिए BIS मानकों का पालन अनिवार्य किया गया था अदालत ने कहा कि ये प्रावधान मूल कानून के “अधिकार क्षेत्र से बाहर” हैं। ? कोर्ट की अहम टिप्पणियां FSSAI का अधिकार केवल मानव उपभोग के लिए खाद्य पदार्थों तक सीमित है “खाद्य सुरक्षा” जैसे शब्दों का विस्तार कर पशु चारे को शामिल नहीं किया जा सकता कानून की पूरी संरचना ही मानव भोजन के नियमन पर आधारित है कोर्ट ने साफ कहा: “मवेशियों के चारे को रेगुलेट करने के लिए बनाया गया कोई भी नियम अधिनियम के दायरे से बाहर होगा।” ? BIS मानकों पर भी स्पष्टता अदालत ने यह भी कहा कि: भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के मानक स्वैच्छिक होते हैं इन्हें अनिवार्य बनाने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है FSSAI द्वारा 2019, 2020 और 2021 में जारी निर्देश भी रद्द कर दिए गए ? निष्कर्ष (Box) ? FSSAI पशु चारा रेगुलेट नहीं कर सकता ? कानून केवल मानव भोजन तक सीमित ? BIS मानक बिना सरकारी अधिसूचना के अनिवार्य नहीं