नींद की जांच आम तौर पर नींद की समस्या समझने के लिए होती है। उसी रात दर्ज दिल की विद्युत गतिविधि से भविष्य का हृदय जोखिम भी समझा जा सकता है क्या? NIH की 9 अक्टूबर की रिपोर्ट और उसी दिन प्रकाशित SLEEP अध्ययन ने इस प्रश्न पर नए नतीजे दिए हैं।
पुराने रिकॉर्ड से नया संकेत
शोधकर्ताओं ने नींद की जांच में रिकॉर्ड हुए single-lead ECG को नींद के चरणों की जानकारी के साथ deep learning मॉडल में इस्तेमाल किया। मॉडल को Massachusetts General Hospital के 15,809 मरीजों के डेटा पर तैयार किया गया और Emory तथा Beth Israel Deaconess के क्रमशः 9,810 और 12,576 मरीजों पर बाहरी परीक्षण हुआ।
अध्ययन ने अगले दस वर्ष के हृदय संबंधी नतीजों का जोखिम परखा। परिणाम इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड से निकाले गए थे; यह पीछे के रिकॉर्ड का विश्लेषण था, मरीजों को इस AI के आधार पर इलाज देने वाला परीक्षण नहीं।
कहां संभावना मजबूत, कहां काम बाकी?
NIH के मुताबिक मॉडल ने atrial fibrillation, heart failure और किसी भी कारण से मृत्यु के जोखिम से संबंधित उपयोगी संकेत दिखाए। उम्र, मधुमेह, रक्तचाप और नींद से जुड़े कारकों को ध्यान में रखने के बाद भी संबंध बना रहा। हार्ट अटैक और स्ट्रोक के लिए आगे सुधार की जरूरत बताई गई है।
मरीज के लिए इसका मतलब
संपादकीय निष्कर्ष यह है कि पहले से होने वाली जांच की जानकारी बेहतर इस्तेमाल करने की संभावना रोचक है। लेकिन किसी जोखिम स्कोर से यह निश्चित नहीं हो जाता कि किस व्यक्ति को कब बीमारी होगी। भारतीय मरीजों में उपयोगिता, गलत चेतावनियों और इससे उपचार के नतीजे बेहतर होने का प्रमाण अलग से जांचना होगा।
सिर्फ इस खबर के कारण नींद की जांच या नया उपकरण खरीदने का निर्णय न लें। डॉक्टर से पूछना उपयोगी होगा कि आपके लक्षणों के लिए कौन-सी जांच उचित है और रिपोर्ट में मिले संकेतों पर आगे क्या कार्रवाई चाहिए।
स्रोत और चित्र
https://www.nih.gov/news-events/news-releases/deep-learning-model-using-ecgs-during-sleep-studies-can-predict-cardiovascular-outcomes
https://academic.oup.com/sleep/advance-article/doi/10.1093/sleep/zsag229/8885715
चित्र: Medical Reporter का मौलिक सांकेतिक संपादकीय चित्र; यह किसी मरीज, उपकरण या कार्यक्रम की वास्तविक तस्वीर नहीं है।

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