NTMHP: भारत सरकार ने मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए 10 अक्टूबर 2022 को “राष्ट्रीय टेली मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम” (National Tele Mental Health Programme - NTMHP) की शुरुआत की थी।
यह कार्यक्रम ज़िला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की डिजिटल शाखा के रूप में कार्य करता है, जिसका उद्देश्य देश के हर नागरिक को 24x7 मानसिक स्वास्थ्य परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसके लिए देशभर में टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 14416 की सुविधा शुरू की गई है।
कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य:
- देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 24x7 टेली मानसिक स्वास्थ्य सुविधाएं स्थापित कर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच को कई गुना बढ़ाना।
- परामर्श के साथ-साथ चिकित्सा और सामाजिक हस्तक्षेप प्रदान करने वाला एक व्यापक सेवा नेटवर्क तैयार करना।
- वंचित और दूर-दराज़ के समुदायों तक सेवाओं का विस्तार करना।
अब तक देश के 36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 53 टेली-मानस सेल्स स्थापित किए जा चुके हैं और ये सेवाएं 20 भाषाओं में उपलब्ध हैं। 1 अप्रैल 2025 तक टोल-फ्री नंबर पर 20,05,000 से अधिक कॉल्स का समाधान किया जा चुका है।
टेली-मानस मोबाइल एप्लिकेशन की शुरुआत
10 अक्टूबर 2024 को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर सरकार ने टेली-मानस मोबाइल एप्लिकेशन भी लॉन्च किया है। यह ऐप मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के लिए एक समग्र डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो सामान्य कल्याण से लेकर मानसिक विकारों तक की समस्याओं के समाधान में मदद करता है।
सशस्त्र बलों के लिए विशेष सुविधा
सरकार ने पुणे स्थित सशस्त्र बल मेडिकल कॉलेज (AFMC) में एक समर्पित टेली-मानस सेल की स्थापना की है, जो सभी सशस्त्र बल कर्मियों और उनके आश्रितों को मानसिक स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध कराता है।
प्राथमिक स्वास्थ्य स्तर पर सेवाओं का एकीकरण
सरकार ने देश के 1.75 लाख से अधिक उप-स्वास्थ्य केंद्रों (SHCs) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) को आयुष्मान आरोग्य मंदिर में उन्नत किया है, जिनमें अब मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को भी शामिल किया गया है।
जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (DMHP)
राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम देश के 767 जिलों में लागू किया गया है, जिसमें जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) पर मानसिक रोगों का पता लगाने, इलाज करने और देखभाल की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
सरकार ने पिछले तीन वर्षों में इस कार्यक्रम के लिए ₹230 करोड़ से अधिक की राशि आवंटित की है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं देश के हर कोने में सभी के लिए सुलभ, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण हों।