Ayushman Yojana In Delhi: दिल्ली की नवनिर्वाचित भाजपा सरकार ने राजधानी के निवासियों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने शनिवार को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) को लागू करने के लिए केंद्र सरकार के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।
इस MoU के तहत अब दिल्ली के पात्र परिवारों को सालाना ₹10 लाख तक का मुफ्त और कैशलेस स्वास्थ्य बीमा मिलेगा। केंद्र सरकार की ओर से ₹5 लाख की कवरेज दी जाएगी, जबकि दिल्ली सरकार इसमें ₹5 लाख का अतिरिक्त टॉप-अप जोड़ेगी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, "हमने जो वादा किया था, उसे निभाया है। अब दिल्ली के लोग देशभर के 30,957 से अधिक अस्पतालों में बिना किसी आर्थिक बोझ के इलाज करवा सकेंगे।" उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले अस्पतालों की हालत दयनीय थी और मरीजों को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ता था।
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36 लाख दिल्लीवासियों को लाभ
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने इस अवसर को "ऐतिहासिक" बताते हुए कहा कि "दिल्ली में अब तक इस योजना का लाभ नहीं मिल रहा था, लेकिन अब लगभग 6.54 लाख परिवारों और कुल मिलाकर 36 लाख लोगों को इसका सीधा फायदा मिलेगा।"
उन्होंने बताया कि योजना में 70 वर्ष से अधिक उम्र के लगभग 6 लाख वरिष्ठ नागरिक शामिल होंगे। “यह कोई इंश्योरेंस स्कीम नहीं, बल्कि एश्योरेंस स्कीम है,” नड्डा ने जोड़ा।
1,961 बीमारियों का मुफ्त इलाज
आयुष्मान भारत योजना के तहत 1,961 बीमारियों और 27 चिकित्सा विशेषताओं में पूरी तरह से मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। इसमें अस्पताल में भर्ती, दवाएं, सर्जरी, ICU देखभाल, और अन्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं।
दिल्ली बना 35वां राज्य
दिल्ली अब आयुष्मान भारत योजना को अपनाने वाला देश का 35वां राज्य या केंद्र शासित प्रदेश बन गया है। इस योजना के सुचारु संचालन के लिए दिल्ली सरकार और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के बीच यह समझौता किया गया है।
दिल्ली सरकार ने राजधानी के 24 अस्पतालों को अपग्रेड करने के लिए 1,000 करोड़ रुपये का बजट भी मंजूर किया है, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर सुधारा जा सके।
भाजपा ने 26 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद दिल्ली में सत्ता में वापसी की है और यह निर्णय उनकी पहली कैबिनेट बैठक में लिया गया था। इस कदम को भाजपा के चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों की पूर्ति के रूप में देखा जा रहा है।